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मेरी तो जिंदगी है फकत आप ही के साथ

7 वर्ष पहले
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यहांईदगाह परिसर स्थित हजरत न्याज मोहम्मद काजी बाबा के उर्स में रातभर बेहतरीन कलामों पर लोग झूमते दिखाई दिए। गुरुवार को ईशा की नमाज के बाद कव्वालियों का दौर चला जो सुबह तड़के तक चलता रहा। इस दौरान अकीदतमंदों ने कव्वालों के कलामों पर खूब दाद दी। सर्दी को देखते हुए महफिल खाने को पूरी तरह से कवर्ड किया हुआ है।

देर रात को कैथून के कव्वाल बशीर वजीर चिराग ने जैसे ही होगा ताल्लुक किसी का किसी के साथ और मेरी तो जिंदगी है फकत आप ही के साथ पेश किया तो सुनने वाले झूम उठे। महफिल में सुब्हानअल्लाह की सदाएं बुलंद होने लगी। यहां तीन दिवसीय उर्स बुधवार से शुरू हो गए थे। इसी के साथ ही सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी के बाद देग तबर्रुक तकसीम होता है। दिनभर अकीदतमंदों की भीड़ भी दरगाह पर लगी रहती है। कोई अकीदत के फूल पेश करता है तो कोई चादर। उर्स में खादिमुल खुद्दाम गुलाम मोहम्मद युसूफ साबरी, असगर अली अंसारी, सईद अंसारी, शौकत अंसारी, फिराेज खान, असलम बाबा सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे।

सुनेलमें ताजिए निकाले

सुनेल. कस्बेमें हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शुक्रवार को 40 वे के ताजिए निकाल गए। इस्लामपुरा से दोपहर करीब साढ़े 12बजे 40 वें का एक ताजिये का जुलूस रंजा चौक,राममंदिर चौक,कचहरी चौक,शिवमंदिर चौक,छत्री चौक होते हुए गुलाब शाह बाबा की दरगाह पहुंचे गुलाब शाह बाबा की दरगाह पर लंगर का आयोजन किया गया है। इसके बाद ताजिये को आहू नदी पर करबला पर ले जाकर ठंडा किया गया।

असनावर.कस्बेमें चालीसवे के मोहर्रम निकाले गए। मोहर्रम नई आबादी से बस स्टैंड होते हुए निकाले गए उसके बाद ताजियों काे उजाड़ नदी में ठंडा किया गया।

सुनेल.शुक्रवार काे निकाले गए चालीसवे के ताजिए।

झालावाड़. काजी बाबा की दरगाह पर उर्स के चलते की गई आकर्षक रोशनी।

झालावाड़. काजी बाबा के उर्स में कलाम पेश करते कव्वाल।