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मुआवजे के विवाद ने लगाया गागरीन बांध पर ब्रेक

7 वर्ष पहले
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वर्ष2006 में स्वीकृत गागरीन बांध पर पुर्नवास के बाद अब मुआवजे के विवाद ने ब्रेक लगा दिए हैं। इसका समाधान करने के लिए कछुआ चाल से प्रयास किए जा रहे हैं। कारगर हल नहीं निकाल पाने के कारण पिछले 10 से बांध का काम एकदम ठप पड़ा है। हालत यह है कि बांध का अभी तक 55-60 प्रतिशत ही काम हुआ है। इससे क्षेत्र में हरित क्रांति का संचार करने के उद्देश्य को करारा झटका लगा है।

आवर के पास आहू नदी पर बन रहे गागरीन बांध में करीब पांच हजार किसानों की 1372 हैक्टेयर भूमि डूब में रही है। इनमें से 1178 हैक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया जा चुका है। शेष 194 हैक्टेयर भूमि का मुआवजा देना बाकी है। इन्हें नए कृषि भूमि अधिग्रहण एक्ट से मुआवजा मिलेगा। जिन किसानों को पहले भुगतान कर दिया है। उन किसानों ने नए अधिनियम से मुआवजा देने की मांग को लेकर गत नवंबर में बांध का काम रुकवा दिया था। तब से लेकर अभी तक बांध का काम ठप पड़ा हुआ है। इसके समाधान के लिए अभी तक कारगर पहल नहीं हो सकी है। चंवली खंड के अभियंता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर किसानों को समझाने के प्रयास किए जा रहे है, लेकिन वे नहीं मान रहे हैं। इसलिए बांध का काम बंद है।

बांध से 9 हजार हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

आहूनदी पर बन रहे गागरीन बांध से क्षेत्र के 40 गांवाें की करीब 9 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी है, जिससे क्षेत्र में खुशहाली आएगी। लेकिन देरी के चलते कमांड क्षेत्र के किसानों को इसका फायदा नहीं मिल सका है।

समितिका निर्णय आने के बाद कुछ कह सकते हैं

^गागरीनबांध के डूब में किसानों ने नए एक्ट से मुआवजा देने की मांग काे लेकर काम रुकवा दिया था। कमेटी बनाकर इसका हल निकालने के लिए जनवरी में कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को लिखा जा चुका है। इसके बाद वहां से कुछ सवाल किए गए, जिनके जवाब दे दिए हैं। लेकिन जब तक वहां से कोई निर्णय नहीं जाता तब तक इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। आरआरमीणा, एक्सईएन,चंवली खंड, झालावाड़

102 हेक्टेयर के अवार्ड जारी

गागरीनबांध के डूब में रही 194 हेक्टेयर में से 102 हेक्टेयर भूमि के लिए अवार्ड जारी हो चुके हैं। इन किसानों को शीघ्र मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। बाकी किसानों के लिए भी प्रक्रिया चल रही है।

लागतपहुंची 242 करोड़ रुपए

2006में स्वीकृत गागरीन मध्यम सिंचाई परियोजना पर 80 करोड़ रुपए ख