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श्रमिकों के बनाए जाएंगे स्मार्ट कार्ड, होंगे हर काम

5 वर्ष पहले
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श्रमऔर रोजगार मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी ने कहा कि राजस्थान में ज्यादा से ज्यादा मजदूर श्रम विभाग में रजिस्टर्ड हों इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

इसके लिए इनका डाटा कलेक्ट किया जा रहा है। पहले 2 लाख 96 हजार मजदूर श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे। जब हमने सर्वे कराया तो पता चला कि राज्य में सवा करोड़ श्रमिक कार्य करते हैं। ऐसे में श्रम विभाग में पंजीकृत नहीं होने पर इन श्रमिकों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सबसे पहला काम श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन का किया है। इसके तहत निर्माण क्षेत्र में 10 लाख श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र में 25 लाख श्रमिक रजिस्टर्ड हो चुके हैं। रजिस्ट्रेशन का यह डाटा एक करोड़ से ऊपर पहुंचेगा। श्रम मंत्री ने यह बात बुधवार को मिनी सचिवालय सभागार में पत्रकारों से बातचीत में कही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य में एक करोड़ असंगठित श्रमिकों को चिंहित करेंगे और उनको स्मार्ट कार्ड जारी करेंगे। इस स्मार्ट कार्ड के माध्यम से इन श्रमिकों को श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए लगातार योजनाएं बन रही हैं। मजदूरों के लिए जो योजनाएं राजस्थान में बनाई गई हैं वह काफी कारगर हैं। मजदूरों को बीमारी, बच्चों की पढ़ाई लिखाई, आवास ऋण सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

केवल15 हजार रजिस्ट्रेशन ही हो पाए

श्रमऔर रोजगार मंत्री टीटी ने माना कि जिले में श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन पर्याप्त नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले बार जब वह झालावाड़ आए थे तो यहां पर अधिकारियों को 25 हजार श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन के निर्देश दिए थे, लेकिन केवल 15 हजार ही रजिस्ट्रेशन हो पाए हैं। यह रजिस्ट्रेशन पर्याप्त नहीं हैं। जिन अधिकारियों ने काम नहीं किया है उनकी मॉनिटरिंग की जाएगी और इसके लिए दंड भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी सर्किट हाउस से लेकर मिनी सचिवालय तक आने में कई सारे मजदूर काम करते हुए मिले जिनके रजिस्ट्रेशन नहीं हुए थे। इन सभी का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री के साफ निर्देश हैं कि उनके क्षेत्र में कोई भी मजदूर लेबर कार्ड से वंचित नहीं रहे।

किएनियम लचीले

मंत्रीने कहा कि पहले श्रमिकों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई फार्मेलिटी पूरी करनी पड़ती थी। इन कठिनाइयों को दूर किया गया है और नियमों को लचीला बनाया गया है। अब श्रमिकों और उनके बच्चों के खातों में सीधे ही राशि मिल रही है। इसमें जितनी भी फार्मेल्टियां थीं सब खत्म कर दी गई हैं। उन्होंनें कहा कि मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देने का काम किया जा रहा है। पहले श्रम इंस्पेक्टर और कमिश्नर श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन करते थे, लेकिन अब ग्राम सेवक से लेकर एईएन और विकास अधिकारी, मित्र केंद्रों पर इसकी जिम्मेदारी गई है। यानी चालीस हजार लोगों को रजिस्ट्रेशन करने की पॉवर दे दी गई है। पहले कार्ड 1 साल के लिए बनता था, लेकिन अब पांच साल के लिए बनता है। पहले बार बार फीस जमा करानी पड़ती थी अब एक बार ही नॉमिनल फीस जमा होती है।

दोसाल में 3600 करोड़ रुपए एकत्रित किए

मंत्रीने कहा कि श्रम मंत्रालय में अभी काफी बजट है। पैसे की कहीं कोई दिक्कत नहीं रही है और ही आने दी जाएगी। कांग्रेस ने पांच साल में जितना पैसा एकत्रित नहीं किया था उससे कहीं गुना ज्यादा हमने दो साल में एकत्रित किया है। अभी हमारे पर 3600 करोड़ रुपए हैं। बड़ी सोच के साथ काम किया है।

मंत्रीबोले- हमने बदली युवाओं की सोच

मंत्रीने कहा कि हमने युवाओं की सोच में बदलाव किया है। पहले युवा सरकारी नौकरियों को ही सुरक्षित मानते थे, लेकिन अब हमने प्राइवेट सेक्टर के द्वार खोले हैं। युवाओं को कौशल विकास में पारंगत किया है।ऐसे में युवाओं को अब मल्टीनेशन कंपनियों में बेहतर पैकेज पर काम मिल रहा है।राज्य में 1 लाख 4 हजार युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जिसमें से 54 हजार को नौकरियां मिली हैं। कौशल विकास में 22 करोड़ का बजट था जो अब बढकर एक हजार करोड़ का हो गया है। ग्राम सभाओं में 9995 बच्चों को रजिस्टर्ड कर लिया है। मंत्री टीटी ने कहा कि स्किल डवलपमेंट में राजस्थान का पहला नंबर आया है। पहली स्किल यूनिवर्सिटी जयपुर में खुलने जा रही है। पहली बार सिंगापुर से राजस्थान का एमओयू हुआ है। अब तक इस तरह का एमओयू राज्य स्तर पर नहीं होता था।

रोजगारकार्यालयों को कॅरियर सेंटर के रूप में किया विकसित

मंत्रीने कहा कि रोजगार कार्यालयों को अब कैरियर सेंटर के रूप में विकसित किया है। संभाग स्तर पर रोजगार कार्यालयों में काउंसलर की नियुक्ति की जा रही है। यह काउंसलर युवाओं को कैरियर गाइडेंस देने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में किस तरह से तैयारी करनी है यह युवाओं को बताएंगे।

अबमिलेंगे अधिकारी और इंस्पेक्टर

श्रममंत्री ने कहा कि राज्य के सभी श्रम विभागों में अधिकारी और इंस्पेक्टर की कमी बनी हुई है, लेकिन अब 170 अधिकारी मिलेंगे। इसके बाद अधिकारी और इंस्पेक्टर के सभी जगह पद पूरे हो जाएंगे। राज्य में 60 हजार कोर्ट मामले पेंडिंग थे जिनको कम कर 7 हजार किया गया।

मंत्री ने कहा कि खनन क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है तो इस पर नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था करवाएंगे। सिलिकोसिस बीमारी के लिए 1 जनवरी से शिविर लगवाए जा रहे हैं। इसमें देश के अच्छे डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। शिविर में जो भी इस बीमारी से ग्रसित मिलता है उसको तुरंत ही एक लाख रुपए की सहायता दी जा रही है जबकि मृत्यु होने पर 3 लाख रुपए सहायता दी जा रही है।

यहमिलते हैं लाभ

मजदूरबीमा में पहले 5 लाख रुपए का लाभ मिलता था उसे अब पौने दस लाख रुपए तक बढ़ाया गया है। साधारण मौत पर पहले 70 हजार रुपए मिलते थे, अब 3 लाख रुपए मिलेंगे। इसी तरह विकलांग होने पर 5.75 लाख रुपए की सहायता मिलेगी।

मकान लोन लेकर बनाता है तो 50 हजार रुपए से 1.50 लाख रुपए का अनुदान मिलेगा। कार्ड होल्डर के लिए लड़की की शादी में 50 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। श्रमिक की लड़की के 18 साल की होते ही 55 हजार रुपए डाले जाएंगे।

इस योजना का लाभ एक कार्डधारी की दो बच्चियों को मिल सकेगा। इसी तरह इंश्योरेंस कंपनी से बीमा करवाया जा रहा है जिसमें 3 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त मिलेगा। श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए भी सहायता दी जा रही है। इस सहायता के अलावा जो 70 प्रतिशत से अधिक लाते हैं उनको अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है। यह सहायता आठवीं पास होते ही मिलने लग जाती है।

झालावाड़. मिनी सचिवालय में विभागों की समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारी।

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