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अंडरग्राउंड केबल से 40 फीसदी उपभोक्ता ही जुड़े
शहरमें अंडरग्राउंड केबल बिछाकर उपभोक्ताओं को गुणवत्ता के साथ निर्बाध बिजली देने के लिए साढ़े 10 करोड़ रुपए खर्च किए, जिससे सिर्फ 40 प्रतिशत क्षेत्र ही कवर हो पाया है। इसमें सिर्फ 1200 कनेक्शनों को ही जोड़ा जा सका। बाकी साढ़े 7 हजार कनेक्शन अभी भी ओवर हैड लाइनों से जुड़े हैं। इतना ही नहीं अंडरग्राउंड लाइन में फाल्ट ढूंढ़ने के लिए मशीन तक नहीं मिल पाई है। इससे बिजली चोरी रोकने के साथ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
नवंबर 2012 में अंडरग्राउंड केबल बिछाने और बिजली चोरी रोकने के लिए साढ़े 10 करोड़ का (आरएपीडीआरपी) में प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। इसे एक वर्ष में पूरा किया जाना था। समय पर काम पूरा नहीं करने पर ठेकेदार की कार्य अवधि बढ़ाकर मार्च 2014 तक कर दी गई। इसके बावजूद रेंगती गति से काम चला, जो सितंबर 2014 में पूरा हो सका।
इससे करीब 40 प्रतिशत शहरी क्षेत्र ही कवर हो सका और सिर्फ 1200 कनेक्शन को अंडरग्राउंड लाइन से जोड़ा जा सका। इस कारण बाकी के उपभोक्ता अभी भी ओवर हैड लाइनों से कनेक्शन पर निर्भर हैं। अंडरग्राउंड लाइन प्रोजेक्ट के मंजूर होने के साथ ही फाल्ट लोकेटर मशीन मंगवाई जानी थी, जिससे लाइनों को आसानी चेक किया जा सके। करीब दो साल निकलने पर भी फाल्ट लोकेटर मशीन तक नहीं मिल सकी। हाल में शहर के साइनाथपुरम, हरिनगर, तिलकनगर और गागरोन रोड पर अंडरग्राउंड लाइन में आए फाल्ट को ढूंढ़ने में काफी दिक्कत हुई।
उपभोक्ताओं के बताने पर अंदाज से खुदाई करवाकर फाल्ट को ढूंढ़कर सुधारा गया, तब जाकर उन क्षेत्रों में बिजली बहाल हो सकी।
दो महीने पहले भेजा रिमाइंडर
जनवरी में भेजेंगे नए प्रस्ताव
खुलीऔर ओवर हैड लाइनों वाले क्षेत्रों में भी अंडरग्राउंड केबल बिछाने और ओवर हैड लाइनों को हटाने के लिए जनवरी में फिर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर विद्युत निगम को भेजे जाएंगे, ताकि पूरे शहर में बिजली तंत्र को स्मूथ किया जा सके। उसमें खुली लाइनों को हटाने का काम भी शामिल रहेगा। एईएन ने बताया कि अभी बिछी लाइन से बिजली लॉसेस कितने कम हुए है, इसके बार में फिलहाल रिपोर्ट नहीं मिली है।
येहोने थे फायदे
शहरमें करीब 48 प्रतिशत छीजत और बिजली चोरी हो रही है। अंडरग्राउंड केबल वर्क के बाद इसे घटाकर 15 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य था। इसके अलावा लाइन टूटने से होने