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कद्‌दू के व्यावसायिक उत्पादन ने किसानों की बदली सोच

7 वर्ष पहले
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झालावाड़. बनारे के एक खेत में लहसुन की फसल के बीच उगी कद्दू की बेल।

भास्कर न्यूज| झालावाड़

खेतीकरने की नई तकनीक ने किसानों की सोच बदलकर रख दी है और वह एक समय में दोहरी फसल लेकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। प्रगतिशील किसानों ने ऐसा संभव करके दिखाया है। वे लहसुन के साथ कद्‌दू की फसल का व्यावसायिक उत्पादन कर रहे हैं।

वर्तमान में राजपुरा, बन्या और बानोर के किसान करीब 70-80 हैक्टेयर में लहसुन के साथ कद्‌दू की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। लहसुन के अलावा एक बीघा में करीब 100 क्विंटल कद्‌दू की पैदावार होती है। एक समय में दो फसल लेने से रखरखाव का खर्च भी बचने उनको फायदा मिलता है। अच्छा उत्पादन होने से किसानों की सोच भी बदल गई है। अब वे उन्नत तकनीक के साथ एक समय में दोहरी फसल ले रहे हैं। इससे उनमें खुशहाली रही है। इन गांवों में उत्पादित कद्‌दू की ज्यादातर खपत स्थानीय मार्केट में हो जाती है। अच्छे भाव मिले इसके लिए किसान कद्‌दू कोटा, बारां, रामगंजमंडी और नीमच मंडी जे जाकर बेचते हैं। थोक मंडी में 15-20 रुपए किलो तक उनको भाव मिल जाते हैं। कद्‌दू को लंबे समय तक संभाल कर रखा जा सकता है, इसलिए इसमें नुकसान की कम संभावना रहती है। यही वजह है कि अब जिले के और किसान उन्नत तकनीक के समायोजन से दोहरी फसल ले रहे हैं। राजपुरा के प्रगतिशील किसान रामनिवास नागर ने बताया कि इस बार कद्‌दू के बीज की जल्दी बुवाई कर दी है। क्षेत्र में करीब 300 से 400 बीघा में इसकी खेती की जा रही है।

नवंबर-दिसंबरमें करते हैं बुवाई

लहसुनसर्दी की फसल होती है, जिसे कम तापमान की आवश्यकता होती है। जबकि कद्‌दू गर्मी की फसल है। उन्नत तकनीक के समायोजन से किसान नवंबर-दिसंबर में कद्‌दू के बीजों की सीधी बुवाई कर इसकी सार संभाल करते हैं। लहसुन की खुदाई के बाद कददू की बैलों में पुष्पन और फलन शुरू हो जाता हैं।

पौधतैयार कर रोप सकते हैं

कृषिविज्ञान केंद्र के असिस्टेंट प्रोफेसर रामराज मीणा ने बताया कि प्रगतिशील किसानों को इसकी बुवाई और रखरखाव के बारे में प्रशिक्षण और समय-समय पर सलाह दी जाती है। सीधे बीज बोने के अलावा इसकी पौधे तैयार करके रोप सकते हैं। प्लास्टिक प्रोट्रेस में इसकी पौध तैयार कर 6 सप्ताह बाद रोप सकते हैं।