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हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए प्रयास जरूरी
हिंदीदिवस के अवसर पर रविवार को शहर सहित जिलेभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज झालावाड़ में हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा की वर्तमान दशा और दिशा विषय पर परिचर्चा हुई। इस अवसर पर प्राचार्य डा. सुनील भार्गव ने कहा कि हिंदी भाषा हमारे स्वातंत्रय संघर्ष की भाषा थी जिससे उसके प्रति निष्ठा चाहिए।
भारत माता के स्वाभिमान को ऊंचा रखने के लिए हिंदी को शुद्ध रुप से अपने विचारों एवं सृजन में अधिक से अधिक प्रयुक्त करना चाहिए। प्रोफेसर दिनेश मीणा ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी अपने वैश्विक स्वरुप की ओर प्रगति कर रही है। विशिष्ट अतिथि जेडीबी कॉलेज कोटा की मनीषा शर्मा ने हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए उसके तकनीकी पक्ष को मजबूत करने की बात कही। अशोक कंवर शेखावत ने कहा कि हिंदी आत्म गौरव की भाषा है जिससे अभिव्यक्ति हमारे गहन चिंतन को विश्व में श्रेष्ठ साबित करती है। रुपम कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हिंदी सहज एवं सरल अनुभूति की भाषा है। रेखा भदोरिया ने कहा कि हिंदी में हमारे मन के उदगारों को व्यापक आयाम मिलते हैं। इस अवसर पर ओपी बैरवा, रामकिशन माली, नरेश वर्मा, प्रघुम्न वर्मा सहित कई ने विचार व्यक्त किए। राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के तत्वावधान में हनुमान मंदिर अकलेरा में हिंदी दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन कियाग या। इस अवसर पर अध्यक्षता नंदलाल केसरी ने की। गोष्ठी में सभी ने हिंदी में कार्य करने का संकल्प लिया और हिंदी को राष्ट्र का गौरव बताया। कार्यक्रम में कर्मचारी महासंघ के सचिव गोपाल मेघवाल, चंद्रप्रकाश चंदोलिया सहित कई ने विचार व्यक्त किए। डायनेमिक क्लासेज के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाई गईं।
गंगाकी तरह बहता नीर है हिंदी
हिंदीदिवस के अवसर पर संवाद एवं राजकीय हरिश्चंद्र सार्वजनिक पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का केंद्रीय विषय राष्ट्रभाषा हिंदी का स्वरुप एवं चुनौतियां थी। इसमें मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राेफेसर डा.आशिष त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी गंगा की तरह बहता नीर है। हिंदी में ब्रज, अवधी,मालवी, हाड़ौती जैसी भाषाओं ने अपना विलय कर त्यागमयी भूमि का निर्वहन किया है। विशिष्ट अतिथि डा.सज्जन पोसवाल ने