बाल विवाह का दुष्परिणाम भोग रही सोना
पांचवर्ष की मासूम सोना आज मां-बाप के प्यार के लिए तरस रही है। नानी सूडी बाई बचपन से ही सोना का लालन पालन कर रहीं है। घर-घर दस्तक के दौरान लाडली सम्मान अभियान के ग्राम मित्रों से सूडी बाई बताती है कि बेटी निर्मला की बाल विवाह 14 साल के उम्र में दातिया खेडी के नारायण सिंह से हुई थी जिससे सोना पैदा हुई किन्तु नारायण सिंह सोना को अपना बच्ची मानने से इन्कार कर निर्मला को छोड दिया और दूसरी ब्याव रचा ली। निर्मला भी बच्ची को छोडकर पालकन्दा के पुरीलाल के साथ नाते चली गयी अब इसका कोई भी देख रेख करने वाला नहीं है मै जब तक हू तब तक तो ठीक है बाद में क्या होगा कुछ पता नही बाल विवाह की शिकार बनी सोना को पिता के होते पालनहार का लाभ भी नहीं मिल सकता ताकि जिससे इसका परवरिस हो सके। ये नजारा बोरदा ग्राम पंचायत में राज्य सरकार बाल अधिकारिता विभाग, यूनिसेफ एवं पीसीसीआरसीयू द्वारा संचालित लाडली सम्मान अभियान के घर-घर दस्तक के दौरान देखने को मिला। कारवां के ग्राम मित्रों ने ग्राम पंचायत रूण्डलाव के बावडीखेडा, सीताफल, नारायणपुरा, सोहनखेडी, देवडी बोरदा के बिन्दा, डूलखेडा, वृत्याखेडी, नाहरडी गावों में समझाईस कर सामाजिक संरक्षण योजनाओं के 19 आवेदन तैयार करवाने की कवायद की जिसमें पालनहार के 9, वृद्वा के 4, विधवा के 3, विकलांग के 2 एवं अन्य के 1। तो वही रामावि रूण्डलाव में बालिकाओं को षिक्षा के महत्व एवं बाल विवाह के दुष्परिणामों को सांप सीढी खेल के माध्यम से बताया गया। इसके पूर्व ग्राम पंचायत डोण्डा में रात्रि चौपाल का आयोजन हुआ जहंा बडे पर्दे पर काली फिल्म दिखाई गयी। चैपाल के दौरान अभियान संयोजक विपिन तिवारी ने उपस्थित जन समूह को जन्म से लेकर 18 वर्ष तक एक बच्चें को किन किन चीजो से सुरक्षित करनी है इसकी जानकारी देते हुए बाल विवाह नही करने की शपथ दिलाई। इस मौके पर कारवां के समन्वयक बाबूलाल, रोहित, अविनाष शर्मा, पप्पू पांचाल, ताजूराम, धर्मेन्द्र सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।