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दो विभागों की लापरवाही में अटके माॅडल स्कूल
जमीनऔर बजट मिलने के बावजूद डग में मॉडल स्कूल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। तीन साल से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के पास मॉडल स्कूल बनाने के लिए भूमि है। पीडब्ल्यूडी के पास भवन बनाने के लिए बजट है, उसके बावजूद अधिकारियों की अनदेखी का नतीजा है कि अभी तक बच्चों को अपना मॉडल स्कूल नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि जिले में प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर करीब पांच साल पहले मॉडल स्कूलों को स्वीकृति मिली थी।
इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभावान बच्चों का पलायन रोकना और उन्हें सीबीएसई की तर्ज पर आधुनिक शिक्षा दिलाना था, लेकिन सिर्फ झालरापाटन पंचायत समिति के असनावर में ही मॉडल स्कूल इस सत्र में शुरू हो पाया। बाकी अन्य स्थानों पर मॉडल स्कूल के भवन बनना तो दूर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है। डग में 16 बीघा जमीन मॉडल स्कूल के लिए आवंटित है, लेकिन इसके टेंडर अभी तक जारी नहीं हो पाए हैं।
झालावाड़। मॉडल स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक किराया दिया जाएगा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान रमसा के माध्यम से संचालित इन स्कूलों के पास फिलहाल हॉस्टल नहीं है। अभी यह स्कूल गैर आवासीय सिस्टम से ही संचालित हो रहे हैं। जिले में अभी एक ही स्कूल शुरू किया गया है, जो झालरापाटन पंचायत समिति के असनावर में है। इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आने जाने का बस का किराया मिलेगा। यदि रोज औसत 20 रुपए मानें तो भी करीब 3000 रुपए प्रतिदिन सरकार बच्चों पर खर्च करेगी। इस स्कूल में अभी 147 बच्चों का प्रवेश है। बस का किराया देने के पीछे सरकार की मंशा अधिक से अधिक प्रतिभावान बच्चों को ऐसे स्कूलों से जोड़ने की है। रमसा की ओर से इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं दिलाई जा रही हैं, वहीं अब घर से स्कूल तक आने-जाने का खर्चा यानी बस का किराया भी हर महीने दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से इसको लेकर तत्काल प्रस्ताव मांगे गए हैं। एडीपीसी ने बताया कि बस का किराया देने के सरकार से आदेश आए हैं। अब प्रस्ताव बनाकर भेज रहे हैं कि इन पर प्रतिदिन कितना खर्च आएगा।
बकानीमें नहीं हो पाया काम पूरा
बकानीमें भी मॉडल स्कूल का काम चल रहा है। अभी तक यहां पर इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। इसी का नतीजा है कि इस शिक्षा सत्र में मॉडल स्कूल शुरू नहीं हो पाया। अब अगले शिक्षा सत्र में इसके शुरू होने की उम्मीद है।
^ डग में मॉडल स्कूल के लिए जमीन मिले तीन साल हो गए हैं। इसका बजट भी उसी समय गया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अभी तक इसके टेंडर जारी नहीं किए हैं। यह बजट रमसा से डायरेक्ट पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर होता है। रंगलालमीणा, एडीपीसी, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, झालावाड़