‘हिंदी से ही राष्ट्रीय एकता को गति’
राजकीयस्नातकोत्तर कॉलेज में हिंदी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को प्रथम सत्र में हिंदी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता हुई। जिसमें छात्र छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। दूसरे सत्र में हिंदी भाषा से ही राष्ट्र का विकास संभव विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें छात्र रघुनाथ जोशी, अक्षय पांचाल, अनिल शर्मा, टीना कुमार सहित अन्य ने पक्ष में बोलते हुए कहा कि मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा होने के नाते हिंदी में ही राष्ट्रीय एकता को गति मिलती है।विपक्ष में बोलते हुए छात्रा लक्ष्मी कुमारी, महावीर नागर ने कहा कि स्थानीय बोलियों की भी राष्ट्रीय विकास में महत्ती भूमिका होती है।
अत उनको उपेक्षित करके तथा दक्षिण क्षेत्र की भाषाओं को महत्व देकर हम केवल अधूरे विकास को सोच सकते हैं। डाॅ. हमीद अहमद ने परिचर्चा के तकनीकी पहलुओं को समझाते हुए कहा कि परिचर्चा में वक्ता को अपने विषय पर पकड़ के साथ ही हाव भाव एवं अभिव्यक्ति कौशल की भी प्रभावी प्रस्तुति करनी होती है। तृतीय सत्र में आशुभाषण प्रतियोगिता हुई। इसमें मतदान, नैतिक शिक्षा, अशिक्षा, बाल विवाह, भ्रष्टाचार, पर्यावरण प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग जैसे विविध विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सत्र की अध्यक्षता कर रही समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष उषा सिंह टांक ने कहा कि यह आयोजनों अनूभूति एवं अभिव्यक्ति का सशक्त मंच हैं।
राजकीय कन्या स्नातकोत्तर कॉलेज में युवा विकास केंद्र और राष्ट्रीय सेवा योजना, हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डा.कुलभूषण ने की। कविता, लेख, दोहों, गीतों भाषा साहित्य का समागम रहा। छात्रासंघ अध्यक्ष वैशाली ने भाषा की संवैधानिक राजभाषा वाली स्थिति से अवगत कराया। डा.कामिनी जोशी ने हिंदी भाषा की शुद्ध वर्तनी को व्यक्तित्व से जोड़कर देखा। चारूलता तिवारी ने हिंदी साहित्य में कबीर के योगदान को गीतों, दोहों, सखियों के माध्यम से छात्राओं के सामने प्रस्तुत किया।
फूल तो उपसर्ग की पहचान है....
अखिलभारतीय साहित्यक परिषद के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बजरंगलाल, विशिष्ट अतिथि झालरापाटन के राजकुमार जैन टिल्लू, जगदीश सोनी, बजरंगलाल बावरा, डालूराम गोड़ थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परमानंद भारती