भगवान की भक्ति से ही सभी सुख की प्राप्ति: आचार्य महेश
सहायताफाउंडेशन चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को आचार्य पंडित महेश भाई तेहरिया ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान श्री द्वारकाधीश ने 16108 विवाह किए।
साक्षात परमात्मा ने वेदों की रिचा, जनकपुरी की कन्या, दण्ड मारन वन की ऋषि प|ियों ने यहां द्वापर में आकर भगवान का वरण करती है। सीधी सी बात है जो मानव या गोपी भगवान को ईश्वर मानकर अपना पूरा जीवन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर देती है। आचार्य ने कहा कि भक्त सुदामा श्री द्वारकाधीश के यहां केवल तीन मुठ्ठी चावल लेकर गए। यहां मोल तीन मुठ्ठी चावल का नहीं सुदामा के भाव का है और श्रीकृष्ण तो केवल अपने भक्तों के भाव पर रीझ जाते है, द्वारकाधीश ने सुदामाजी को तीन लोक की संपदा भगवान श्री ने भक्त सुदामा को प्राप्त करा दी और तेहरिया ने विस्तृत व्याख्या करते हुए, भागवत धर्म का वर्णन में भक्ति, ज्ञान वैराग्य, तत्व जो भक्ति ज्ञान वैराग्य से जो तत्व की प्राप्ति करा देता हो वो है भागवत महापुराण (तत्व किया है) तत्व है ब्रम्ह श्री नारायण और कहा कि राजा परीक्षित ने अंतिम समय पर भी शुक्रदेव जी महाराजा राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त कर दिया। भागवत कथा के मुख्य जजमान चन्द्रमोहन गौतम, मनोज त्रिपाठी के सपरिवार सहित भागवत महापुराण का पूजन किया और व्यास पिंड विराजमान महेश भाई तेहरियसा का भी पूजन किया।
झालरापाटन. सहायता फाउंडेशन के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु।
झालरापाटन. भागवत कथा कथा वाचन करते आचार्य तेहरिया।