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हाथों के पंजे और एक पैर नहीं फिर भी पढ़ाई का जुनून
झालरापाटन| ईश्वरने चाहे शरीर रचना में कमी छोड़ दी हो, लेकिन दीत्याखेड़ी निवासी भोला के होसलों की ही उड़ान है कि उसको दोनों हाथों के पंजे और एक पैर नहीं होने के बावजूद वह पढ़ाई में किसी से पीछे नहीं है। झालावाड़ जिले के दित्याखेड़ी गांव निवासी भोला मेहर की उम्र 13 साल है। पैदाईश से ही उसके दोनों हाथों के पंजे एक पैर नहीं है। इसके दूसरे पैदा का पंजा भी नहीं है। उसके बावजूद भोला को पढ़ाई की लगन है।
फिलहाल वह राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल दित्याखेड़ी में पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। भोला को पैदाईश से ही शारीरिक अपंगता है। उसके माता पिता मजदूरी कर घर का खर्च चलाते हैं, जबकि वह अपनी दादी के साथ रहता है। हाथ के पंजे नहीं होने से वह दोनों हथेलियों में पेन को फंसाकर लिखता है, लेकिन पढ़ने में उसकी लगन का ही नतीजा है कि वह किसी भी अन्य बच्चों से कमजोर नहीं है। भोला बताता है कि वह उच्च शिक्षा हासिल कर कुछ करना चाहता है ताकि उसके शारीरिक कमजोरी को मात मिल सके।
कक्षामें सबसे अच्छा छात्र
राजकीयउच्च प्राथमिक स्कूल दित्याखेड़ी की शिक्षिका आशा नामदेव ने बताया कि भोला को पढ़ने का काफी शौक है। इसी के चलते वह कक्षा के अन्य सभी बच्चों से आगे रहता है। हमेशा वह कक्षा में अव्वल आता है। हाथ नहीं होने के बावजूद उसकी लिखावट में कोई कमी नहीं आती है।
झालरापाटन. भोला।