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सांगरी-नागफनी-करौंदा स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ
जोबनेर | श्रीकर्णनरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर में चल रही शुष्क क्षेत्रीय फल अनुसंधान की राष्ट्रीय कार्यशाला में शनिवार को अखिल भारतीय शुष्क फलों की कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली डॉ. एनके कृष्ण कुमार ने कहा कि शुष्क फल पोषण गुणवत्ता के रूप में वरदान होने के साथ ही मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होते हैं। शुष्क फलों के उत्पादन को बढ़ाया जाना चाहिए। डॉ. कुमार ने राजस्थान का गौरव खेजड़ी वृक्ष को शुष्क फलों में शामिल करने की बात भी कही। उन्होंने कहा खेजड़ी की सांगरी का देश विदेश में बहुत मांग है। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ फल होता है। खेजड़ी शुष्क क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन को सहन करने वाला वृक्ष माना जाता है। इसके फलों का उत्पादन, मूल्य संवर्धन खाद्य प्रसारण पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने ओडीसा की तर्ज पर खेती में नागफनी की विभिन्न प्रजातियों के प्रवर्धन, संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि नागफनी औषधियुक्त होता है। कृषि महाविद्यालय जोबनेर अधिष्ठाता डॉ. जीएल केशवा ने कृषि विश्वविद्यालय में चलाए जा रहे कृषि अनुसंधान की जानकारी देते हुए बताया कि 200 से अधिक विभिन्न किस्मों 250 उन्नत कृषि तकनीकी का विकास किया गया है। डॉ. एसके शर्मा निदेशक केन्द्रीय शुष्क फल अनुसंधान संस्थान ने देश में शुष्क फलों पर हो रहे अनुसंधान की जानकारी देते हुए किसानों को शुष्क फलों जैसे बेर, आंवला, खजूर, अनार, बेल, अंजीर, करौंदा, लसोड़ा, सीताफल, इमली आदि के लिए जागरूक होकर फलोत्पादन करने की आवश्यकता बताई। इस मौके पर शुष्क फलों की शस्य क्रियाओं पर आधारित पुस्तक जोबनेर की शुष्क फल योजनाओं की तीन दशक की उपलब्धियों की पुस्तक का विमोचन किया गया। राष्ट्रीय कार्यशाला के समन्वयक डॉ. एसके खण्डेलवाल ने बताया कि क्षेत्र में फसलोत्पादन के लिए राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिक प्रगतिशील कृषक के साथ शुष्क फलों के उत्पादन, उत्पादकता गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीकी किस्मों पर चर्चा भी की जाएगी।
जोबनेर. कृषिविश्वविद्यालय जोबनेर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उपस्थित कृषि वैज्ञानिक।