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किसानों को जागरूक करें

7 वर्ष पहले
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श्रीकर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को शुष्क क्षेत्रीय फल अनुसंधान पर राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। केन्द्रीय शुष्क फल अनुसंधान केन्द्र बीकानेर के निदेशक डॉ. एसके शर्मा ने कहा किसान की आजीविका के लिए शुष्क फलों जैसे बेर, आंवला, खजूर, अनार, बेल, अंजीर, करौंदा, लसोड़ा, सीताफल, इमली आदि की गुणवत्ता को बढ़ाकर व्यावसायिक करने के लिए किसानों को जागरूक किया जाना चाहिए।

शुष्क फलों पर अनुसंधान कार्य 10 राज्यों के 17 अनुसंधान केन्द्रों पर चल रहा है। इनमें चार राजस्थान, दो उत्तर प्रदेश, दो गुजरात, तीन महाराष्ट्र एक-एक पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटक हरियाण में हैं। सेवानिवृत्त निदेशक केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान केन्द्र बीकोनर सेवानिवृत्त निदेशक ने कहा कि शुष्क फलों में पोषक तत्वों की अधिकता पाई जाती है। इनको भोजन के साथ प्रयोग करने पर स्वास्थ्य में अनुकूल लाभ में सहयोग मिलता है। निदेशक केन्द्रीय अनुसंधान परिषद त्रिवेन्द्रम के निदेशक ने बताया कि शुष्क फलों की उपयोगिता को देखते हुए किसानों को जागरूक कर इनमें फलों से संबंधित होने वाली बीमारियों समस्याओं के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। इससे उत्पादन बढ़ाया जा सके। राष्ट्रीय कार्यशाला के समन्वयक डॉ. एसके खंडेलवाल ने कृषि महाविद्यालय जोबनेर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से परियोजना तीन वर्ष से अनुसंधान करने तथा एक पुस्तक तैयार करने की जानकारी दी। इस पुस्तक का कार्यशाला के अंतिम दिन विमोचन होगा। राष्ट्रीय कार्यशाला में किसानों को शुष्क फलों के उत्पादन, उत्पादकता गुणवत्ता के लिए विशेष चर्चा के साथ किसानों के आर्थिक लाभ को बढ़ाने के लिए जागरूक किया जाएगा।

राष्ट्रीय कार्यशाला के समन्वयक डॉ. एस.के. खंडेलवाल ने बताया कि क्षेत्र में फसलोत्पादन वर्षा पर आधारित है तथा किसान की आजीविका के लिए शुष्क फलों जैसे बेर, आंवला, खजूर, अनार, बेल, अंजीर, करौंदा, लसोडा, सीताफल, इमली आदि की गुणवत्ता को बढ़ाकर व्यावसायिक करने के लिए किसानों को जानकारी दी जाएगी।

इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिषद दिल्ली के 6 अनुसंधान संस्थान 12 कृषि विश्वविद्यालयों के लगभग 60 कृषि वैज्ञानिक प्रगतिशील कृषक शुष्क फलों के उत्पादन, उत्पादकता गुणवत्ता बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

जोबनेर. कृषिविश्वविद्यालय में आयोजित