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तीन घंटे की मशक्कत से उत्पाती बंदर को पकड़ा

7 वर्ष पहले
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जोबनेर. पकड़ेगए उत्पाती बंदर को देखते लोग।

जोबनेर | नगरपालिकाक्षेत्र में दो दिन से आतंक का पर्याय बने एक उत्पाती बंदर ने कई लोगों को जख्मी बना कर दर्द दे दिया, लेकिन इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन स्वयंसेवी संस्था से जुड़े श्रीकृष्ण गोशाला समिति के अध्यक्ष विष्णु पारीक ने पहल करते हुए रेस्क्यू टीम को बुलाया तथा खतरनाक हो चुके बंदर को पकड़े जाने के बाद लोगों को राहत महसूस की। बुधवार को बंदर के पकड़े जाने से पहले भी तीन लोगों को उसने काटकर जख्मी कर दिया था। लोग इतने ज्यादा खौफजदा रहे कि कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा तो कई अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए हाथों में डंडे लेकर जाना पड़ा। गौरतलब है कि कस्बे में दो दिन में 14 लोगों को जख्मी कर हॉस्पिटल पहुंचा देने वाले बंदर के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, जिससे लोगों में आक्रोश था।

इसतरह दबोचा

रेस्क्यूटीम के लोगों ने बुधवार को खाता चौक में पिंजरा लगाकर उसमें केले मूंंगफली डालकर बंदरों को आवाज लगाई। बंदर धीरे-धीरे जाल के पास आया और लालच में पिंजरे में कैद हो गया। वार्ड एक नागा मोहल्ले में राजाराम शर्मा एक महिला के जख्मी करने की सूचना मिली, तो रेस्क्यू टीम नागा मोहल्ले में पहुंची और लोहे का पिंजरा लगाकर बंदर को केले का लालच देते हुए पिंजरे में बंद कर लिया। खूंखार बंदर को पकड़नेे में मिली सफलता पर लोग खुश हुए तथा उसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े। रेस्क्यू टीम ने उत्पाती बंदर के अलावा भी अन्य कई बंदरों को पिंजरे में पकड़कर सरिस्का के जंगल में छोड़ने की बात कही।

समयपर इलाज कराएं

^बंदरके काटने से जख्मी लोगों को समय पर इलाज कराना चाहिए। बंदर के पागल होने की स्थिति में उसके काटने से रैबीज होने का खतरा रहता है। -डॉ.राजेन्द्र प्रसाद कुमावत, सरकारीअस्पताल