तप की शक्ति महिमा अपरंपार
तपकी शक्ति महिमा अपरमपार है। इसे हम तो गा सकते और कह सकते। तपस्या से कई उपलब्धियां प्राप्त होती है।
यह विचार जैन श्रमण संघ की उपप्रवर्तनी श्री सत्यसाधना ने मंगलवार को अंबेश भवन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज हम जीवन के झूले में झूल रहे है। जिसमें हम जन्म लेते है और आगे मृत्यु निश्चित है। तप हमें संदेश देता है कि अगर संसार सागर से तिरना है तो पापों को छोड़ना पड़ेगा तथा पुण्य का उपार्जन करना होगा। तप चक्रेश्वरी अरूण प्रभा ने कहा कि संकल्प मजबूत हो तो असंभव कार्य को भी किया जा सकता है। दृढ़ संकल्पी अपनी मंजिल पा लेता है। संसार में जिसकी संकल्प शक्ति मजबूत होती है वह कामयाबी पाता है। आठ कर्मों के अंदर मोहनीय कर्म सब कर्मों का राजा है। इसी मोह कर्म के कारण निदान करने की मन में आती है। तप संयम साधना की शक्ति नहीं है तो उसका निदान करना फलित नहीं होगा। जिस व्यक्ति के पास तपस्या साधना का बल है वो ही निदान कर सकता है। महासती हित साधना के 25,आशा सिरोया के 32, भावना चंडालिया के 27 उपवास पूरे हुए। अब 23 सितंबर को नवगृह शांति का जाप तथा पांच अक्टूबर को ज्ञान वृद्धि के लिए प्रश्न मंच का आयोजन होगा।
कपासन | अंबेशभवन में साध्वी सत्य साधना के प्रवचनों का लाभ लेते श्रावक-श्राविकाएं।