प्रेम सहृदयता से दान देकर करें सेवा
धर्मऔर दान में चतुराई और चालाकी करते हुए लोग दान की घोषणा करके देते समय अपनी सुविधानुसार गलियां निकाल लेते है। जैन दर्शन में दान का बहुत महत्व है। प्रेमभाव और सहृदयता के साथ दान देकर सेवा करना चाहिए। आज व्यक्ति खाओ-पीओ मौज करो और बीमार हो जाओ तो अस्पताल जाओ की प्रवृति में जी रहा है। रोटी ताजा खाना चाहेगा पर ज्ञान बासी लेना चाहता है। यदि ताजा ज्ञान लेना है तो अनवरत स्वाध्याय करना चाहिए। भगवान ने भी कहा है कि स्वाध्याय से ज्ञानावर्णीय कर्म क्षय होते हैं।
यह विचार शासन दीपक अक्षय मुनि ने अरिहंत भवन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी चेतना को नियंत्रण में रखना चाहिए और केवल एक दिशा में लगाकर टाइम पास के लिए नहीं जीना चाहिए। धर्म साधना में हड़बड़ाहट मत कीजिए, एक सामयिक करने पर ही वह सार्थक होगी। पहले जब घर में लड़की लाते थे तो परिवार के बारे में जानकारी प्राप्त करना, लड़की को देखने जाना आदि विधिपूर्वक तरीके से लाते थे। आज इसमें भी ताबड़तोड़ तरीका अपनाने लगे हैं। जिसके दुष्परिणाम भी समाज को भोगने पड़ रहे है। संत श्रीचंद ने कहा कि ब्रह्मचर्य व्रत सर्वश्रेष्ठ तप है। धर्मसभा को उमराव ओस्तवाल मुंबई ने भी संबोधित किया। संचालन मंत्री विमल कुमार कोठारी ने किया।
कपासन|अंबेशभवनमें तप चक्रेश्वरी अरूण प्रभा मसा ने कहा कि जैन दर्शन का सिद्धांत है कि वह व्यक्ति संसार परिभ्रमण करेगा जो अन्य धर्म गुरु, देव को मानता है। साध्वी गुरु कीर्ति मसा ने कहा कि मृत्यु को रोका नहीं जा सकता ही उसे पोस्टपोन किया जाता है। पैसा परिवार प्रतिष्ठा की मजबूत दीवारें भी मृत्यु को रोक नहीं सकती। दम निकलने से पहले मृत्यु को सुधारने के लिए जिंदगी का सारा दम लगा लेना, चिता जलने से पहले अपने अमूल्य चिंतन को जगा देना। मृत्यु की कोई तिथि नहीं होती आने में कभी लेट नहीं होती। जिसको लेके जाती उसका कोई गेट नहीं होता। महासती हित साधना के 24 सितंबर को 33 उपवास पूर्ण होने पर कार्यक्रम होगा।
कपासन |साध्वी श्री हित साधना (बीच में) के गुरुवार को 33वां उपवास था अंबेश भवन में अन्य साध्वियों के साथ।