जिंदगी गुजारो मत, जीओ
चित्तौड़गढ़ | जिंदगीको सिर्फ गुजारो मत, बल्कि उसे जीअो। सिर्फ छुओ मत, उसे अहसास करो। देखो ही मत, गौर भी करो। पढ़ो ही मत जीवन में उतारो भी। सुनो ही मत, ध्यान से सुनो और समझो। इसे अागम से जोड़ना है।
जीवन के बारे में यह मूलमंत्र महासती पद्मश्री ने सोमवार को खातर महल में प्रवचन देते हुए दिए। साध्वी ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि ब्रह्म दत्त मुनि से पूछता है पांच भवों तक हम साथ-साथ रहे पर इस भव में अलग-अलग क्यों हुए। यह कहानी उनकी ही नहीं, हमारी भी है। अतीत वर्तमान और भविष्य से जुड़ा हुआ है। हमारी आत्मा ने भी सभी जीवों के साथ अनंत भव के दौरान सारे संबंध स्थापित किए हैं। हमें वर्तमान में मनुष्य जन्म भी अतीत के कार्य से मिला है। प्रवक्ता इंद्रसिंह पामेचा ने बताया कि वर्ण एकासन कार्यक्रम के तीसरे दिन पीले वर्ण का एकासन हुआ।
कपासन| अंबेशभवन में तप चक्रेश्वरी अरूण प्रभा मसा ने कहा कि जो व्यक्ति पाप करता है, उसकी गति नरक के सिवा दूसरी कोई नहीं हो सकती। एक जीव जब नरक में जाता है तो उसके शरीर के एक रोम में कई रोग होते हैं। ऐसे रोग को सहन करने से अच्छा कि हम हमारा जीवन धर्म आराधना में लगाएं। उन्होंने कहा कि पाप करना, निंदा, घोर क्रूर कर्म और पंचेन्द्रिय जीव की हत्या करने वाला नरक का मेहमान है। साध्वी सत्यसाधना मसा ने कहा कि हमारे शरीर के अंदर साढ़े तीन करोड़ रोम हैं। एक-एक रोम के अंदर पौने दो रोग लगे हुए हैं। अशुभ कर्म का उदय आता है तब बीमारियां निकलती हैं। हित साधना के 24 उपवास, सिरोया आशा के मासखमण 32 है। उनकी ओर से चौबीसी का कार्यक्रम स्थानक में रखा है। भावना बहन के 25 रेखा सांखला के छह उपवास है।