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फसलों में अंतिम पानी की जरूरत चालू करें नहर, किसानों में रोष
सोयाबीनकी फसल को एक और पानी की आवश्यकता है। बुवाई के समय मौसम की मार के चलते किसानों को दो-तीन बार बुवाई करनी पड़ी थी। अब जैसे-तैसे फसल खड़ी होकर खेत में नजर आने लगी है, तो बिना पानी के फसल सूखने की स्थिति में गई है।
कापरेन क्षेत्र में अधिकांश खेतों में सोयाबीन की फसल है। इस समय फलियों में दाना आने लगा है। बरसात नहीं होने से खेतों में नमी गायब होने लगी है। बालोद निवासी राजेंद्र मीणा, रोटेदा उपसरपंच रामप्रताप गुर्जर, कापरेन निवासी विष्णु शृंगी, रूपशंकर बागडा आदि ने बताया कि बरसात हुए काफी दिन गुजर गए। फसलों में अंतिम पानी की आवश्यकता है। यदि इस समय फसलों को पानी नहीं मिला, तो उत्पादन पर असर पड़ेगा। फलियों में दाना पूरा बनने से पहले सूख जाएगा और पूरी तरह नहीं पकने से घटिया किस्म रहेगी। किसानों का कहना है कि चंबल में पानी छोड़ने की जगह प्रशासन नहरों में पानी छोड़े, तो फसलों को बचाया जा सकता है। पूर्व पंसस सदस्य राजेंद्र मीणा ने बताया कि क्षेत्र में सोयाबीन की फसल 50 से 55 दिनों की हो चुकी है। वहीं बरसात भी नहीं हो रही है। ऐसे में प्रशासन नहरों में जल प्रवाह करे, तो फसलों को बचाया जा सकता है। अडीला माइनर अध्यक्ष बृजराजसिंह हाड़ा, हाड्याखेड़ा माइनर अध्यक्ष भगतराम मीणा, अणदीलाल गुर्जर, नाथूलाल मीणा, सारसला निवासी मुकट गुर्जर, अनिल, प्रकाश मीणा आदि ने सीएडी प्रशासन से नहरों में शीघ्र जलप्रवाह शुरू करने की मांग की है।