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लाखेरी क्षेत्र के तीन हजार मजदूरों पर रोजी-रोटी का संकट गहराया
लाखेरी. क्षेत्रके तीन हजार से ज्यादा मजदूरों पर रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) भोपाल के फैसले के बाद क्षेत्र में संचालित ईंट भट्टे बंद होने के कगार पर हैं। इससे मजदूर क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। पर्यावरण को लेकर एक याचिका पर एनजीटी ने यह फैसला दिया था।
150से 200 भट्टे: क्षेत्रमें 150 से 200 ईंट भट्टे हैं। एसीसी सीमेंट उद्योग के बाद ईंट उद्योग क्षेत्र में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा लघु उद्योग है। भट्टों पर चमावली, कांकरा, खरायता पापड़ी सहित कापरेन, केपाटन और अन्य स्थानों के मजदूर परिवार सहित मजदूरी करते हैं। वहीं भट्टे बंद होने से मजदूरों को भटकना पड़ेगा। क्षेत्र में बनी ईंटें जिले सहित हाड़ौती में प्रसिद्ध है। इसके अलावा जयपुर, अजमेर, सवाईमाधोपुर क्षेत्र में अच्छी खासी आपूर्ति होती है।
यहभी सच है: क्षेत्रमें कई लोगों ने सिवायचक और चारागाह सहित कृषि भूमि पर भट्टे संचालित कर रखे हैं। इसके चलते कानूनी पेचीदगी से भट्टों पर संकट हुआ है।
ऐसीबनी स्थिति: भट्टोंको लेकर हाई कोर्ट जयपुर में वाद दायर किया था। वहां से मामला एनजीटी भोपाल में पहुंचा। वहां पर्यावरण एवं प्रदूषण को देखते हुए भट्टों को बंद करने का फैसला आया। इससे प्रशासन के सामने इन्हें बंद करने की स्थिति बनी।
नईप्रक्रिया कठिन: एनजीटीने अपने फैसले में नई प्रक्रिया से भट्टे लगाने का भी सुझाव दिया हैं। मैदानी और कछावा भट्टों को प्रदूषण युक्त मानते हुए चिमनी वाले भट्टे लगाने की बात कही है, जो काफी महंगा है। ऐसे भट्टे लगाना हर किसी के बूते की बात नहीं है। इसमें लागत ज्यादा आती है। वहीं कृषि भूमि पर भट्टे लगाने के लिए प्रशासन से नियमानुसार अनुमति जरूरी बताया है।
मुख्यमंत्रीसे लगाएंगे गुहार: एनजीटीके फैसले से ईंट भट्टों पर संकट गहरा गया है। मजदूरों पर भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री से मिलकर न्यायोचित प्रयास करेंगे।
-परमानंदसैनी, उपाध्यक्षईंट भट्टा एसोसिएशन लाखेरी
लाखेरी। नगर में स्थित ईंट भट्टा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल ने इन्हें बंद करने का फैसला सुनाया है।