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समय हुआ पूरा,नहर निर्माण अधूरा

7 वर्ष पहले
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संवेदक विभाग की लापरवाही के कारण 18 माह से काम सुस्त गति से

मदनमोहनगुप्ता| करसाई

आमजनको लाभान्वित करने के लिए सरकार की संचालित योजनाओं के प्रति विभागीय अधिकारी संवेदनशील नहीं हैं। मामचारी बांध को सुरक्षित रखने के लिए जायका योजनांतर्गत करोड़ों रुपए की लागत से मरम्मत की जा रही है। मगर विभागीय अधिकारियों की उदासीनता संवेदक की लापरवाही के चलते तय समय में नहर निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है।

मामचारी बांध को सुरक्षित रखने के लिये जायका स्कीम के तहत रिपेयर एंड रिन्योवेशन डेम माइनर लघु सिंचाई परियोजना का कान्ट्रेक्ट वर्ष 2011-12 मे मेसर्स कन्हैयालाल चौधरी टोडारायसिंह, जिला टोंक को दिया गया। जिसका एग्रीमेंट नंबर 02-1213 है, लागत 2.70 करोड़ की लागत से कार्य को पूरा करने के लिये विभाग द्वारा एक साल का समय दिया गाया, जिसकी 22-4-2012 से 21-4-2013 को कार्य पूर्ण करने की शर्त भी विभाग ने रखी लेकिन समयावधि समाप्ति के 18 माह बाद भी तीन माइनर का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। जबकि अफसरों की मेहरबानी के चलते संवेदक ने कार्य के अधूरे निर्माण पर 2 करोड़ रुपए का भुगतान उठा लिया है।

3 वर्ष पूर्व जापान की जायका कंपनी द्वारा मामचारी बांध के रख रखाव मरम्मत के लिए माइनर लघु सिंचाई परियोजना का किसानों तक सुनिश्चित लाभ पहुंचाने के लिए सीसी नहर निर्माण के लिए करीब 2.70 करोड़ रुपए का कान्ट्रेक्ट संवेदक को दिया। नहर निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं, क्योंकि रबी कि फसल की बोआई का समय नजदीक आता जा रहा है और नहर निमार्ण पूरा नहीं हो सका है।

नहरनिर्माण में सौतेला व्यवहार : बांधसे 3 माइनरों के लिए अलग-अलग नहर निकलती हैं, जिसमे संवेदक द्वारा करसाई के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। किसान बाबू मीणा, गजबी मीणा, मोहरपाल मीणा, श्यामा मीणा, लज्जा मीणा, सीताराम प्रजापत, बाबू प्रजापत, शर्मी मीणा, जगदीश मीणा, लज्जा प्रजापत, अतवल मीणा आदि ने बताया की तरौली कोटा माइनर को जाने वाली नहरों को अधिक चौड़ा ऊंचा लम्बी बनाया जा रहा है। वहीं करसाई माइनर को जाने वाली सीसी नहर को कम चौड़ी ऊंची लम्बी बनाने की संवेदक कह रहा है, जिससे किसानों मे मायूसी छाई हुई है।

मामचारी बांध परियोजना कि फर्म ने बांध का निर्माण पूरा किए बिना ही अधिक