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सैकड़ों मरीज एक डॉक्टर के हवाले

7 वर्ष पहले
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जिलेभर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जवान, बुजुर्ग, बच्चे तथा महिलाओं की भीड़ सुबह से लेकर शाम तक जिला मुख्यायल स्थित सामान्य चिकित्सालय करौली में लगी रहती है। वहीं कुछ सैकड़ों रोगी ऐसे भी हैं जो दोपहर में डॉक्टरों के घर पर दिखाने में असमर्थ है, वह अस्पताल में ही आपातकालीन कक्ष में स्थित डॉक्टर को दिखाने के लिए मजबूर है।

दोपहर में डॉक्टर के कक्ष के बाहर सैकडों की संख्या में रोगी अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। भीड़ की अधिकता को देखते हुए गार्डों को भी दिनभर मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। अगर दोपहर में एक और चिकित्सक लगा दिया जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है।

जिला अस्पताल में रोगियों को देखने का समय सुबह 8 से 12 और शाम को 5 से 7 बजे तक का है। इस दौरान तो लगभग डेढ़ हजार रोगी अपना उपचार कराने में कामयाब हो जाते हैं, लेकिन भीड़भाड़ को देखते हुए दूर दराज क्षेत्र से आने वाले रोगी डॉक्टरों के चले जाने के बाद आपातकालीन कक्ष के बाहर बैठे एक मात्र डॉक्टर के यहां लाईन में लग जाते है। आपातकालिन कक्ष में स्थित डॉक्टर 12 बजे से लेकर लगभग 5 बजे तक 500 से अधिक रोगियों का उपचार करता है। वहीं यही स्थिति शाम की भी है शाम को भी एक डॉक्टर 7 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक आपातकालीन कक्ष में बैठता है। इस बीच में वार्डों में आवश्यकता पड़ने पर वार्डों की जिम्मेदारी भी उसी पर रहती है। ऐसे में आपातकालीन मरीज को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दोडॉक्टर को लगाएं

मौसमीबीमारियों को देखते हुए चिकित्सा विभाग द्वारा आपातकालीन समय में दोपहर रात को दो-दो डॉक्टरों का लगाया जाना आवश्यक है। तभी रोगियों को समुचित उपचार मिल सकता है। भानुप्रताप उर्फ बटरु गुर्जर, मधुसूदन चरौरा, ऋषि शर्मा, शेरसिंह बैंसला, गौरव शर्मा, सुमित भट्ट सहित कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मौसमी बीमारी को देखते हुए आपातकालीन कक्ष में दो डॉक्टरों को तैनात किया जाए। इससे मरीजों को सही उपचार मिल सके।

नहींहो सकता इंतजाम

सामान्यचिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीराम मीणा ने बतया कि सामान्य चिकित्सालय करौली में स्टाफ की कमी के चलते आपातकालिन समय में 2 डॉक्टरों को लगाना संभव नहीं है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 52 पद स्वीकृत हैं