पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • रोग निवारण की प्रतिमूर्ति है बीजासण मैया

रोग निवारण की प्रतिमूर्ति है बीजासण मैया

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रोग निवारण की प्रतिमूर्ति है बीजासण मैया

कैलादेवी.धार्मिकनगरी कैलादेवी से दो किमी पहले ही करौली-कैलादेवी मार्ग पर मां बीजासन का मंदिर है। यह मंदिर गांव खौहरी में काफी प्राचीन है इतिहास भी अनोखा है। किवदंतियों के अनुसार सैंकडों वर्ष पूर्व गांव में महामारी फैलने से भारी संख्या में पशुधन काल के मुंह में समां गया और इंसान भी कई लाइलाज बीमारियों की चपेट में गया। इससे गांव में त्राहि-त्राहि मच गई। महामारी से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने समीप के गांव बसई में मां के भक्त रामसिंह धोबी के पास पहुंच समस्या का हल ढूंढ़ने का प्रयास किया तो देवी मां के भक्त ने बताया कि गांव को बीमारी से बचाने के लिए बीजासण माता मंदिर की स्थापना करनी होगी। भोपा के सुझाव पर पीड़ित ग्रामीणों ने देवी मां की प्रतिमा को बसई से खौहरी गांव लागकर प्राण-प्रतिष्ठा करवाई और मंदिर निर्माण कराया। बताते हैं कि मौजूद मंदिर वाले स्थान पर आकर प्रतिमा इतनी वजनी (भारी) हो गई कि ग्रामीण उसे उठा नहीं सके। वजनी से भारी होने के कारण ही इस माता का नाम बीजासण पड़ा और मां के चरण पड़ते ही गांव में फैली बीमारी से निजात मिल गई। इसलिए मां बीजासण को रोग निवारण की प्रतिमूर्ति कहा जाता है। आज भी बीजासण मां के दर्शन मात्र से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।