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टेंडर नहीं होने से अटक गया उपकारागृह मरम्मत का कार्य
उपकारागृहकी मरम्मत के लिए पूर्व में 29 जून 2012 को 3.99 लाख और 8 अक्टूबर 2013 को 3.15 लाख रुपए मंजूर हुए थे। इनसे उपकारागृह में नाली निर्माण, चौक में शौचालय, पुरुष महिला बैरकों में कोटा स्टोन का फर्श, बिजली फिटिंग गैस फिटिंग का कार्य हो पाया था। वर्तमान में उपकारागृह में चौक के लोहे का जाल, लोहे का दरवाजा, महिला बैरक में शौचालय एवं उपकारागृह की साफ-सफाई पुताई का कार्य शेष है। यह कार्य 10.75 लाख रुपए से पूरा होना है।
दोवर्ष से पद खाली
मरम्मतकार्य एवं इसके लिए आवंटित होने वाले बजट में देरी के चलते दो वर्ष से उपकारागृह बंदियों से खाली पड़ा हुआ है। 6 नवंबर 2012 को उपकारागृह के सभी बंदियों को करौली और भरतपुर की जेलों में शिफ्ट कर दिया था। इसके साथ ही उपकारागृह के स्टॉफ को भी इन दोनों स्थानों पर शिफ्ट कर दिया। हिंडौन से संबंधित बंदियों को अदालतों में तारीख पेशी पर इन दोनों ही स्थानों करौली और भरतपुर की जेलों से लाया जाता है। इसमें काफी अतिरिक्त राशि खर्च हो रही है। जेलर राधेश्याम शर्मा ने बताया कि जब उपकारागृह के बंदियों को शिफ्ट किया गया था, तब उपकारागृह में 90 बंदी थे। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर ही उपकारागृह में बंदियों को लाया जा सकता है।
हिंडौन सिटी . टेंडरनहीं होने से अटका उपकारागृह का कार्य।