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फिर गूंजी मोहन की दहाड़

7 वर्ष पहले
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करणपुर. महाराजपुराक्षेत्र में टूटी पड़ी चारदीवारी।

लाखों खर्च िफर भी वन्य जीवों की नहीं सुरक्षा

करणपुर|कैलादेवीअभयारण्य सीमा में वनों की कटाई वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए कैम्पा टीएफसी योजनाओं पर लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई सुरक्षा दीवार को अन्य जिलों के ग्रामीण तोड़कर पत्थरों को ट्रैक्टर से अपने घर निजी उपयोग के लिए ले जा रहे हैं। जबकि इस ओर वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी आंखें बंद कर बैठे हैं। गौरतलब है कि करौली जिले के अंतिम छोर पर सवाईमाधोपुर सीमा से सटे कानरदा गांव के पास जंगल को बचाने के लिए बनाई गई पक्की चारदीवारी को सवाईमाधोपुर सीमा के लोग टैक्टरों में भरकर ले जा रहे हैं। जगह जगह पूरी दीवार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जबकि सरकार द्वारा हर साल कैलादेवी अभयारण्य की चारदीवारी करने को वन विभाग के पास लाखों रुपए का बजट रहा हैं लेकिन विभागीय अधिकारी इस बजट को पानी की तरह बहा कर चेहेते लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं।

वन विभाग द्वारा सुरक्षा दीवार महाराजपुरा वन सीमा क्षेत्र में बनाई गई है लेकिन दोनों जिलो की सीमा क्षेत्र की बाधा आडे़ जाने से नजदीकी पुलिस थाना करणपुर में उसका मामला दर्ज नहीं हुआ तो सवाईमाधोपुर जिले के बहरावडा कलां थाने में मामला दर्ज कराया गया लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

^चारदीवारी को तोड़कर ले जाने वालों के खिलाफ बहरावडा कलां थाने में मामला दर्ज कराया है। दूसरे जिले के लोग फायदा उठा रहे हैं। इस बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया है। जबकि वर्ल्ड लाईफ वन अधिनियम 1972 की धारा 32 33 के तहत एक से तीन साल की सजा का प्रावधान है। सीलाकंवर, फोरेस्टर,महाराजपुरा वन चौकी

करणपुर. टाइगरमोहन (फाइल फोटो) (इनसेट) नैनियाकी रैंज के भीतला की डूंगरी के पास जगदीश गुर्जर के खेतों में टाइगर के पदचिह्न।

मुकेश गुप्ता | करणपुर

रणथंभौरसीमा में करीब सवा साल से विचरण कर रहा टाइगर मोहन (टी-47) ने एक बार फिर कैलादेवी अभयारण्य में आकर अपनी दहाड़ सुनाकर पहचान बनाई है। सोमवार को नैनियाकी रैंजर मंगलचंद जाट को जंगल में टाइगर के देखे जाने की सूचना मिली। इस पर डंगरा नांका प्रभारी मूलचंद मीणा, घंटेश्वर चौकी प्रभारी रामलाल गुर्जर विजेन्द्र सिंह जंगलों में पहुंचे और भीतला की डंूगरी के पास जगदीश गुर्जर के खेतों में टाइगर के पदचिह्न के लिए और मौके पर ही प्लेट बनाई गई। मंगल