जीवन में परमात्मा को जानना जरूरी
आजइंसान संसार की दृश्यमान वस्तुओं में सुख ढूंढ रहा है, जो उसे मिलने वाला नहीं है, संसार में जो कुछ भी दिख रहा है नष्ट हो जाने वाला है। यह विचार संत ज्ञानचंद ने अजमेर रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर रविवार को सुबह आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए। मण्डल प्रवक्ता रामचन्द टहलानी के अनुसार संत ज्ञानचंद ने कहा कि आज इंसान अनेक शक्तियां प्राप्त कर लेता है पर निराकार प्रभु परमात्मा को जानना नहीं चाहता है, अगर इंसानी जीवन में आकर प्रभु परमात्मा को नहीं जाना तो उसका मानव जीवन व्यर्थ जाता है। परमात्मा को जाने बगैर विश्वास नहीं होता, जब विश्वास नहीं होगा तो परमात्मा को प्रीत भी नहीं होगी, जब प्रीत नहीं होगी तो परमात्मा की भक्ति भी नहीं होगी, निरंकार प्रभु परमात्मा की जानकारी होने पर हमारा चलना, फिरना, उठना, बैठना, खाना, पीना सब बेकार हो जाता है। इंसान जब परमात्मा निराकार को जान कर सत्संग में बैठता है तो उसके पुण्य बढ़ते जाते है इसलिए देवतागण भी मानव योनि के लिए तरसते है क्योंकि मनुष्य योनि में ही परमात्मा को जानकर उसकी भक्ति की जा सकती है। सत्संग के दौरान दीपा,रेशमा, संगीता, कविता, तरुणा, सीता, रतनचंद, चेतन, गोपाल, गौरव, मोहित, लक्ष्मण आदि ने गीत विचार प्रस्तुत किए। संचालन अशोक रंगवानी ने किया।
संत ज्ञानचंद।
केकड़ी . सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुगण।