अस्पताल में स्वाइन फ्लू संक्रमण का खतरा
राजीवगांधी अस्पताल में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ रहा है। स्वाइन फ्लू का वायरस लिए रोगी पूरे अस्पताल में घूम रहे हैं। राजीव गांधी अस्पताल के रोगी पर्ची काउंटर पर रजिस्ट्रेशन से आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तक की प्रक्रिया ही रोगी को पूरे अस्पताल में चक्कर लगाने को मजबूर कर रही है। अस्पताल में प्रवेश के साथ ही रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी रोगियों की कतार ही संक्रमण को फैलाने के लिए काफी है। लेकिन ये रोगी यहां से पर्ची लेकर अस्पताल के अंत में बने कमरा नंबर दस में मेडिसन विभाग की ओपीडी और स्वाइन फ्लू ओपीडी में पहुंचते हैं। लेकिन स्वाइन फ्लू वायरस फैलाने का सिलसिला स्क्रीनिंग के बाद भी नहीं थमता। ओपीडी से लक्षणों के आधार पर वार्ड में भर्ती करने के बाद परिजन रोगी को लेकर पुराने भवन की गैलरी और सर्जिकल वार्ड तथा दूसरी मंजिल पर मेल मेडिकल और मानसिक रोगी वार्ड के आगे से गुजरकर अंत में बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती के लिए पहुंचते। यहां भर्ती रोगी को सैंपल देने के लिए फिर इतनी ही दूरी तय कर पुराने भवन में सर्जिकल ओपीडी के पीछे बने कक्ष में पहुंचना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन काउंटर, ओपीडी, आइसोेलेशन वार्ड, आईसीयू अलग-अलग स्थानों पर में हैं। इस दौरान काफी लोग संपर्क में आते हैं, जिसे उनमें स्वाइन फ्लू के संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
मांके बाद बेटा मिला पॉजीटिव
गुरुवारको 4 और लोगों की जांच में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आया है। 16 संदिग्ध रोगियों के सैंपल जयपुर भेजे हैं। लक्ष्मणगढ़ का रजत भी पॉजीटिव है। गत दिनों उसकी मां पॉजीटिव आई थी। अलवर की कृष्णा हर्षित, खैरथल की योगिता भी पॉजीटिव है। 2 संदिग्ध जयपुर रैफर किए हैं।
राजीव गांधी और शिशु अस्पताल के रोगियों के स्वाइन फ्लू संदिग्ध रोगियों की अस्पताल के प्रवेश पर ही स्क्रीनिंग कर उन्हें पुराने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती की व्यवस्था हो सकती है। वहीं सर्दी, जुकाम खांसी, अस्थमा निमोनिया के रोगियों की अस्थाई ओपीडी और दवा वितरण केंद्र होना चाहिए। इससे ये रोगी तो अस्पताल में पहुंचेंगे और ही वायरस की चपेट में लोग आएंगे।
^पुरानेआइसोलेशन वार्ड में टिटनेस सहित अन्य रोगी भर्ती होते हैं। लेकिन इन स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्डों और स्वाइन फ्लू की ओपीडी में जाने के लिए अलग रास्ते भी हैं। लेकिन रोगी नहीं मानते हैं। अलग ओपीडी में भी नहीं जाते और सीधे मेडिसन की ओपीडी में ही खड़े रहते हैं। -डॉ.भगवान सहाय, पीएमओ अलवर