खंडेला : दस साल बाद हारी कांग्रेस
दस साल बाद यहां भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा सीटें मिली थी। 27 में से 13 सीटें भाजपा के पास थी और उसे केवल एक निर्दलीय का समर्थन हासिल करना था। पार्टी इसमें कामयाब हो गई। भाजपा के मूलचंद वर्मा को 14 और कांग्रेस के डॉ सुनील दत्त को 12 वोट ही मिल पाए। माकपा के एक सदस्य ने वोट नहीं दिया।
क्योंबनी सहमति? : वर्माको विधायक बाजिया के करीबी होने का फायदा मिला। साफ और मिलनसार छवि के कारण ज्यादातर सदस्य भी इन्हीं के नाम पर सहमत हो गए।
सेवानिवृत्तव्याख्याता हैं : वर्माकरीब छह महीने पहले ही व्याख्याता के पद से रिटायर हुए हैं। पहली बार राजनीति में उतरे और प्रधान बन गए।
खंडेला. जीत के बाद विधायक बाजिया प्रधान वर्मा समर्थकों के साथ।