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शहीदी कलाम के साथ निकले ताजिए

7 वर्ष पहले
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हजरतइमाम हुसैन की शहादत के चहल्लम पर रविवार को कस्बे के प्रमुख मार्गों से ताजिये निकाले गए। सुबह 11 बजे ढोल ताशों के साथ मदीना जामा मस्जिद से ताजिये उठाए गए, जो प्रमुख मार्गो से गुजरते हुए बाबा सैय्यद शाह के आस्ताने पर पहुंचे। इस दौरान बारां के मशहूर राजकमल बैंड के कलाकारों द्वारा इमाम हुसैन की याद में शहीदी कलाम पेश किए गए।

गुदरी के चौराहे पर कस्बे के अलग-अलग स्थानों के तीन अखाड़ा उस्तादों की अगुवाई में युवकों द्वारा हैरतअंगेज व्यायाम का प्रदर्शन किया गया। अंजुमन कमेटी की ओर से अखाड़ों के उस्तादों का फूल मालाओं के साथ साफा बांधकर इस्तकबाल किया गया। दाउदी बोहरा समाज की ओर से परम्परागत तरीके से छबील लगाकर शरबत पिलाया गया। पुराने बस स्टैंड पर हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक सलीम भाई बैंड वाले की अगुवाई में लोगों को तबर्रूक तकसीम किया गया। सारोला रोड पर मोहम्मद भाई की ओर से हलीम बनाकर बांटा गया। शनिवार की रात को मोहर्रम मार्ग पर अकीदतमंदों ने चाय केसर दूध बनाकर पिलाया।

मातमीधुन के साथ निकाले मोहर्रम

पनवाड़. कस्बेमें हजरत इमाम हुसैन की शहादत में 40वें के मोहर्रम कस्बे के मुख्य मार्गो से रविवार को निकाले गए।

इसमें जगह-जगह छबीलें लगाकर शरबत पानी पिलाया गया। हुसैन कमैटी के इरफान मोहम्मद सहित कई युवकों ने बताया कि कस्बे में हजरत इमाम हुसैन की शहादत मे 40वें का मोहर्रम शनिवार रात को जामा मस्जिद से जुलूस के रूप में छोटी मस्जिद के चौक में लाया गया। रविवार को सुबह 11 बजे मोहर्रम का जुलूस ढोल ताशों के साथ मुस्लिम बस्ती से पुलिस चौकी, बड़ा मंदिर, चौपडि़या, जैनियो का मौहल्ला, बस स्टेड़ से कालीसिंध नदी पर करबला के लिए ले जाया गया। इस दौरान उम्मेदपुरा्र खजूरी, बांसखेड़ा, दहीखेड़ा के समाज के लोगो ने भाग लिया। कस्बे मे लोगो ने जगह-जगह छबीलें लगाकर शरबत पानी की व्यवस्था रखी थी। दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।

पनवाड़. चालीसवें के मोहर्रम निकालते मुस्लिम समाज के लोग।

खानपुर. कस्बे में चालीसवें पर निकाले गए ताजिए।