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- \"मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं...\'
\"मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं...\'
खेड़ली|पंचायत समितिकठूमर ग्राम पंचायत सौंखर खेरली रेल की ओर से पशु मेले के समापन पर शनिवार रात कस्बे की कृषि उपज मण्डी प्रांगण में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। रात 9 बजे शुरू हुआ कवि सम्मेलन सुबह चार बजे तक चला। राष्ट्रीय ओज कवि डॉ. हरिओम पंवार ने \\\'मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं, मेरा अंतर्मन घायल है, दिल की परतें खोल रहा हूं\\\' कविता के माध्यम से पिछले साठ वर्षों में संविधान के बनते बिगड़ते स्वरूप और उसकी उपयोगिता को श्रोताओं के समक्ष रखा तो तालियों की गडग़ड़ाहट से पूरा पांडाल गूंज उठा। कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि कठूमर उपखंड अधिकारी राजेंद्र चतुर्वेदी, सीओ सरजीत मीणा द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। कवि सम्मेलन में सर्वप्रथम मथुरा से आई गीतकार डॉ. पूनम वर्मा ने ‘मुझे ऐसा वर दे शुभ शारदे मां.. गाकर मां सरस्वती की वंदना की। हास्य और व्यंग्य के कवि सुदीप भोला जबलपुर ने अनेक पैरोड़ी गाकर श्रोताओं की लय से लय मिलाई। उनकी ‘वक्त के साथ ढल गया होगा, मोम का बुत पिघल गया होगा..’ लोगों द्वारा काफी सराही गई। हास्य के कवि महेन्द्र अजनबी ने अनेक चुटकलों और हास्य किस्से सुनाकर लोगों को खूब हंसाया। मथुरा से कवयित्री डॉ. पूनम वर्मा ने ‘नजर जो मिलती तो जान लेते तुम्हारे दिल में हुजूर क्या है..’ ने पांडाल को रंगीन मिजाज में बदल दिया। दिल्ली से आए अरुण जैमिनी ने अपने खास हरियाणवी लहजे में हास्य चुटकुलों से लोगों को लोटपोट कर दिया। उन्होंने ‘आम तो सेव का ठेला लगाता है, खरीदने तो खास ही जाता है..’ को हास्य व्यंग्य के साथ सुनाया तो लोगों ने काफी सराहा। अलवर से आए ओज के कवि विनीत चौहान ने जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ में सेना द्वारा किए गए राहत कार्य और उससे पहले की तस्वीर को ‘जिनके हाथों में पत्थर थे होठों ने गाली गाई है, उन अहसान फरामोशों की हमने जान बचाई है..’ को श्रोताओं ने खूब सराहा। इस दौरान कठूमर प्रधान जयराम पायलेट, विकास अधिकारी गंगे सिंह, सौखर सरपंच प्रतिनिधि जगदीश सैनी, खेरली रेल सरपंच उत्तम कश्यप, सचिव रामोतार शर्मा, गोविंद शर्मा, मुरारी शर्मा, कृष्णकांत अग्रवाल सहित अनेक लोगों ने अतिथियों का स्वागत किया।
खेड़ली. कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि।