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मरीजों को नहीं मिलती विशेषज्ञों की सेवाएं
सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके मुकाबले स्टाफ कम होने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
कस्बे सहित क्षेत्र के 30 गांवों से उपचार कराने के लिए मरीज सीएचसी पर पहुंचते हैं। अस्पताल के आउटडोर में रोज 200 से 250 रोगी पहुंचते हैं। वहीं 10 से 15 मरीज इनडोर में भर्ती रहते हैं। अस्पताल में खांसी, जुकाम, बुखार, उल्टी, दस्त के रोगी अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। सीएचसी पर स्टाफ की कमी से मरीजों को इंजेक्शन लगवाने, दवाइयां लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
लंबे समय से स्टाफ की कमी क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सीएचसी पर 30 बैड की व्यवस्था है, लेकिन स्टाफ की कमी होने से मरीज भर्ती होने से कतराते हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि सीएचसी पर शिशु रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ सहित पांच डॉक्टरों के पद रिक्त हैं।यहां चार चिकित्सक पदस्थ हैं। इनमें से एक दंत चिकित्सक हैं। उनके पास भी उपकरण नहीं होने दंत रोगियों को सुविधा नहीं मिल रही है। इसके अलावा पांच नर्सिंगकर्मियों के पद रिक्त हैं। वहीं आसपास के उपस्वास्थ्य केंद्रों से नर्सिंगकर्मी प्रतिनियुक्ति पर लगा रखे हैं।
एमटीसीमें नहीं है विशेषज्ञ
अस्पतालमें कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए एमटीसी संचालित है। इसमें भी शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं है। इसके चलते लोग बच्चों को जिला मुख्यालय पर लेकर पहुंचते हैं। सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य रोगियों को भी परेशानी हो रही है।
^समय-समय पर स्टाफ की कमी से उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हैं। उपलब्ध स्टाफ से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के प्रयास किए जा रहे हंै। -डॉ.सतीश अग्रवाल, सीएचसीप्रभारी
भास्कर न्यूज. किशनगंज
सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके मुकाबले स्टाफ कम होने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
कस्बे सहित क्षेत्र के 30 गांवों से उपचार कराने के लिए मरीज सीएचसी पर पहुंचते हैं। अस्पताल के आउटडोर में रोज 200 से 250 रोगी पहुंचते हैं। वहीं 10 से 15 मरीज इनडोर में भर्ती रहते हैं। अस्पताल में खांसी, जुकाम, बुखार, उल्टी, दस्त के रोगी अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। सीएचसी पर स्टाफ की कमी से मरीजों को इंजेक्शन लगवाने, दवाइयां लेने के