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रामलीला में छाया राम परशुराम संवाद

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज. मदनगंज किशनगढ़

सांवतसरस्थित रामलीला चौक पर रामलीला में तीसरे दिन शुक्रवार रात श्रीराम जानकी विवाह का मंचन, लक्ष्मण परशुराम संवाद का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। धनुष यज्ञ में जब कोई भी योद्धा भगवान शिव की धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाता है तो राजा जनक उदास हो उठते है तथा वे कहते है कि लगता है पृथ्वी वीरों से खाली है। इस पर लक्ष्मण क्रोधित हो उठते है और कहते है कि बड़े भैया के कारण मै शांत हूं वर्ना बता देता कि पृथ्वी वीरों से खाली नहीं है।

भगवान श्रीराम शिव धनुष को तोड़ते है उसी क्षण भगवान परशुराम का आगमन होता है। शिव धनुष तोड़ने पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच संवाद होता है। लक्ष्मण परशुराम जी को कहते है कि बहु धनुहि तोरि लरिकाई प्रभु की रिस काई, इस पर परशुराम जी बहुत क्रोधित होते है और बोलते है कि रे नृप बालक काल बस बोलत तुहि ने संभाल धनुहि मम त्रिपुरारि धनु विदित सकल संसार। जब परशुराम को श्री हरि का भान होता है तो वे अपने व्यवहार के लिए क्षमा याचना करते है। इसके बाद श्री राम और जानकी का विवाह होता है। अतिथियों ने माता सीता और श्रीराम तथा रामायण की आरती उतारकर रामलीला को विश्राम दिया गया। इसी प्रकार पुराना शहर रामलीला चौक पर भी श्रीराम विवाह लक्ष्मण परशुराम संवाद सहित अन्य प्रसंगों का मंचन किया गया। नया शहर में अजमेरी गेट पर भी कलाकारों ने श्रीरामलीला के कई प्रसंगों का मंचन किया।

भगवानराम-सीता जन्म का किया मंचन

मुहामी.आदर्शनवयुवक मंडल श्रीनगर द्वारा बस स्टेण्ड श्रीनगर पर चल रही रामलीला के दौरान शुक्रवार रात में स्थानीय कलाकारों द्वारा राम जन्म सीता जन्म का मंचन किया गया। मंडल के संचालक विष्णु प्रकाश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार रात में कलाकारों द्वारा राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न जन्म जनक सुनयना द्वारा हल चलाने से सीता जन्म का मंचन किया गया इस दौरान कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे।

मुहामी. श्रीनगरमें चल रही रामलीला में प्रस्तुति देते कलाकार।