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जानलेवा बन गया है सूदखोरों का जाल

7 वर्ष पहले
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क्रिकेट सट्‌टे से भी उलझे कई लोग

आजकलक्रिकेट सट्‌टे के जाल में भी खूब लोग फंसते जा रहे हंै। ईदगाह के सामने स्थित एक मकान में एक व्यक्ति क्रिकेट आईपीएल सट्‌टा खेलता है। इस सटटे में एक व्यक्ति तीन लाख रुपए हार गया और उसने सटाेरिये को दो लाख रुपए दे दिए और एक लाख रुपए की राशि का चैक दे दिया। लेकिन सटोरिये ने उससे ब्याज दस रुपए से भी अधिक का ब्याज वसूलना शुरू कर दिया जिससे वह राशि ही चुकाता रहा। आखिर परेशान होकर पीड़ित ने कोर्ट के जरिये आरोपी के खिलाफ मदनगंज थाने में परिवाद दायर किया। प्रकरण के बाद भी पुलिस ने ना तो सटाेरिये को पकड़ा और ना ही क्रिकेट सट्‌टे को बंद किया। इसी का परिणाम है कि आज सटोरियों ब्याजखोरों के हौंसले बुलंद होते चले जा रहे है।

रोजपैदा होते जा रहे हंै ब्याजखोर

शहरमें ब्याज के नाम पर पैसा देना का धंधा जोर पकड़ता जा रहा है। मनमाने तरीके से पैसा ब्याज पर दिया जा रहा है। मौहल्ले में हर छठा घर का सदस्य कहीं ना कहीं किसी ना किसी को ब्याज पर पैसा देने का काम करता है। ब्याजखोरों के कईं बड़े गिरोह भी है जो एक दूसरे के संपर्क में होकर लोगों को ब्याज पर पैसा देते है। एक से तीन रुपए सैकड़ा पर ब्याज पर उधार लेने वाला व्यक्ति किसी तीसरे व्यक्ति को पांच से दस रुपए ब्याज दर पर राशि उधार दे रहे है। ऐसा धंधा भी चल रहा है। ब्याजखोर पीडि़त से खाली चैक, स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर, सादे कागज पर लिखवाकर भी ब्याज पर राशि उधार देते है।

दससे पंद्रह रूपए सैंकडे ब्याज पर देते हंै उधार

ब्याजखोरमनमाने ढंग पर ब्याज पर पैसा देते है। एक रुपए सैंकड़ा से तीन रुपए सैंकड़े ब्याज पर राशि उधार देने की बात तो गले उतर जाती है। लेकिन कईं ब्याजखोर ऐसे भी है जो पांच रुपए सैकड़ा से दस रुपए सैंकड़े पर राशि उधार देते है। राशि नहीं देने पर लगातार ब्याज दर बढ़ाते हुए दस से पंद्रह और पंद्रह से बीस रुपए ब्याज वसूलने में भी नहीं चूकते। ऐसे में कोई भी व्यक्ति इनके चंगुल में एक बार फंस जाए तो बाहर निकलनेे की बजाय खुद अपने परिवार को भी बर्बाद करता चला जाता है।

मददकरने के नाम पर फंसाते हंै नौजवानों को

मनमानेढंग से पांच से दस प्रतिशत ब्याज पर उधार देने वाले ब्याजखोर नौजवानों को अपने जाल में फंसाते है। जिसमें स्कूल, कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थी भी शामिल है। ब्याजखोर नौजवानों की मदद करने के