गोसेवा है सबसे बड़ा कर्त्तव्य
मदनगंज किशनगढ़| रामनेररोड पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य नित्यानंद महाराज ने बताया कि मनुष्य तीन ही कारणों से दुखी रहती है। पहला दैहिक, दूसरा दैविक तीसरा भौतिक। मनुष्य दैहिक और भौतिक ताप से ज्यादा दुखी है। इसी तरह महाराज ने बताया कि गोसेवा ही सबसे बड़ा कर्त्तव्य है। मनुष्य को जीव का सम्मान करना चाहिए। गोमाता की भगवान श्रीकृष्ण खुद ग्वाले बनकर सेवा करते थे, जबकि खुद ईश्वर गोसेवा करते थे तो मनुष्य को गोसेवा की कीमत को समझना चाहिए। गोमाता को माता का दर्ज देने के पीछे बहुत बड़ा कारण है। पवित्र नदियों गोमुख से प्रकट होती है। गोसेवा करने का पुण्य लेना चाहिए। गोसेवा के पुण्य से रोग, दोष, दुख, दरिद्र दूर होते है और सुख, समृद्धि, शांति का आगमन होता है। इसलिए गोमूत्र से शरीर के सभी राेगों का इलाज होता है। गोमूत्र से कई तरह की दवाइयां बनती है। कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय ब्राह्मण पार्लियामेंट ने महाराज नित्यानंद का स्वागत किया। स्वागत करने वालों में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र पुरोहित, डॉ. देवराज पुरोहित, अभिषेक पारीक सहित अन्य मौजूद थे।
महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।