किशनगढ़ हवाई पट्टी पर उतरा लड़ाकू विमान
मदनगंज-किशनगढ| द्वितीयविश्व युद्ध में शामिल रह चुका भारतीय वायुसेना का छोटा लड़ाकू विमान टाइगर मॉथ शनिवार को दिल्ली से जाेधपुर जाते किशनगढ़ हवाई पट्टी पर उतरा। इस दौरान वायुसेना के आला अधिकारी उनके साथ थे। करीब आधे घंटे तक ईंधन भराने के बाद टाइगर मॉथ जोधपुर की ओर उड़ान भर गया। इस दौरान भारी पुलिस लवाजमा सुरक्षा की दृष्टि से तैनात था।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1939 में बने लड़ाकू विमान टाइगर मॉथ ने आखिरी बार 1952 में भरी थी। उसके 60 साल बाद इसे 20 जनवरी 2013 को फिर से उड़ाया गया था। शनिवार को दिल्ली से जाेधपुर जाने के लिए रवाना हुआ था। रास्ते में ईंधन भरवाने के लिए सुबह करीब 10.45 बजे हैलिकॉपटर के साथ किशनगढ़ हवाई पट्टी पर उतारा गया। उसके उतरने से पहले सुरक्षा की दृष्टि से थानों की पुलिस मय जाब्ता हवाई पट्टी पर पहुंच गई। वायु सेना के कमांडर जवान साथ में थे। वायुसेना के इंजीनियरों सहित 15 सदस्यीय जवान हेलिकॉप्टर में सवार हो उन पर नजर रखे हुए थे। आधे घंटे रुकने के बाद टाइगर मॉथ जाेधपुर के लिए उड़ान भर गया। जोधपुर से यह बैंगलुरू जाएगा। टाइगर मॉथ को देखते लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और ये कोतुहल का विषय बना रहा।
उड़ानभरना रहा उपलब्धि : कमांडरोंने बताया कि ऐतिहासिक धरोहर बन चुका टाइगर मॉथ विमान को फिर से तैयार कर उड़ाना वायुसेना की उपलब्धि है। टाइगर मॉथ 20 जनवरी 2013 काे किशनगढ़ हवाई पटटी पर उतरा था। इसके बाद ये बैंगलुुरू रवाना हो गया था और वहां अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में इसने हिस्सा लिया था। 24 फरवरी को लाैटते वक्त वह आखिरी बार किशनगढ़ हवाई पट्टी पर उतरा था। अब दो साल बाद ये फिर से किशनगढ़ हवाई अड्डे पर उतरा। एक समय से लगातार 200 से 300 किलोमीटर उड़ान के बाद इसे ईंधन की आवश्यकता पड़ती है। अंतर्राष्ट्रीय एयर शो में भी यह विमान आकर्षण का केंद्र रहा। बिना किसी कंट्रोल टॉवर के किशनगढ़ हवाई अड्डे पर उतारना भी दोनों पायलटों के लिए चुनौती से कम नहीं था।
हवाईपट्टी के पास गए मवेशी : टाइगरमॉथ के उतरने से कुछ मिनटों पहले आवारा मवेशी चरते हुए हवाई पट्टी के निकट गए। ये देख थाना प्रभारी ने तत्काल मवेशियों को दूर भगाने के निर्देश दिए। पुलिसकर्मियों ने दौड़कर मवेशियों को हवाई पट्टी से दूर खदेड़ा।
किशनगढ़ हवाई अड्डे पर उतरा भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना विमान टाइगर मॉथ।