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अब मनमर्जी से दवा नहीं बेच सकेंगे मेडिकल स्टोर्स
मेडिकलस्टोर्स संचालक अब मरीज को बिना डॉक्टरी सलाह के मनमर्जी से दवा नहीं दे सकेंगे। राज्य सरकार की ओर से पूरे राज्यभर में लागू इस नियम को एच-1 नाम दिया गया है। इस श्रेणी में 46 तरह की दवाईयों को मेडिकल स्टोर संचालक मनमर्जी से नहीं बेच सकेंगे। इनका सीधा फायदा आमजन को मिलेगा। हालांकि अप्रैल माह से इस नियम को लागू भी कर दिया गया है। इन दवाओं का पूरा रिकाॅर्ड स्टोर संचालकों को रखना होगा। कितनी सप्लाई आई है और कितनी बिक्री हुई है। दवाएं किन-किन मरीजों को दी गई इसकी पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। स्टोर संचालकों को अलग से रजिस्टर रखना होगा और इस रजिस्टर में दवा ले जाने वाले मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम सहित पूरी जानकारी लिखी होगी। साथ ही मरीज द्वारा लाई गई डॉक्टरी पर्ची की कॉपी भी रखनी पड़ेगी। जिससे मरीज को दी जाने वाली दवा की पूरी जानकारी हो।
जानकारी के अनुसार एच-1 नियमों के तहत सभी मेडिकल स्टोर्स की पूरी जानकारी सहायक औषधि नियंत्रक अजमेर के पास उपलब्ध होगी। इनको दी जा रही 46 ड्रग का पूरा रिकॉर्ड हॉर्ड कॉपी और सोफ्ट कॉपी दोनों तरह से उपलब्ध होगा। मेडिकल स्टोर संचालक प्रत्येक दवा का पूरा हिसाब किताब रखेंगे। बिना डॉक्टरी सलाह के आने वाले मरीजों को सीधे इन 46 तरह की दवाओं में से एक भी दवा नहीं दे सकते। अगर कोई मेडिकल स्टोर संचालक फिर भी इन श्रेणी में शामिल दवाओं में से बिना रिकॉर्ड और बिना डॉक्टरी सलाह के सीधे मरीज को दवा दे देता है तो उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई की जा सकती है। आदेश के बाद सभी मेडिकल स्टोर संचालकों अलग से रजिस्टर रखना शुरू कर दिए है।
ये होगा फायदा
इसनियम के लागू होते ही आम जनता को इसका लाभ मिलेगा। दवाइयों के नाम पर हो रहा गोरखधंधे पर लगाम लगेगी। स्टोर संचालक मनमर्जी से दवा नहीं दे पाएंगे। इसके अलावा मरीज को हायर एंटीबायोटिक दवा नहीं दे सकेंगे। मरीज डॉक्टरी सलाह पर ही दवा लेगा जिससे दवाओं के रियेक्शन या हाइडोज देने का खतरा नहीं होगा। डॉक्टरी परामर्श से ली जाने वाली दवा मरीज के शरीर पर विपरित प्रभाव नहीं डालेगी क्योंकि मरीज डॉक्टरी सलाह के आधार पर नियमित दवा लेगा। जबकि मेडिकल स्टोर द्वारा दी जाने वाली दवा कईं बार बिना डॉक्टरी परामर्श के हाइडोेज दे दी जाती है जो शरीर के रेजिस्टेंस पैदा कर नुकसान पहुंचाती है। विदेशी मेडिसिन विशेषज्ञ भारत में कोई भी वायरस के स्ट्रोंग