हरमाड़ा की शान अब हुई वीरान
भास्कर न्यूज | हरमाड़ा-तिलोनिया
किसीजमाने मेंं जीरे की मंडी के रूप में विख्यात जिस हरमाड़ा मंडी में किसानों व्यापारियों की चहल-पहल रहती थी और बोलियां गूंजती थीं वहां अब सन्नाटा रहता है। करीब दस बीघा क्षेत्र में फैली मंडी में उपज रखने के लिए प्लेटफार्म आज भी हैं लेकिन जिंसें नहीं आती हैं। बाउंड्रीवाल चैकपोस्ट भी हैं मगर रोकने के लिए बैलगाड़ियां नदारद हैं।
गांव के ही बड़े बुजुर्गों ने बताया कि हरमाड़ा गांव जीरे की मंडी के लिए प्रसिद्ध था। दूर-दूर से जीरे की पैदावार को लेकर किसान यहां आते थे। यहां सुबह से शाम तक जीरे की बोलियां लगती थी। भावों में उतार चढ़ाव भी यहीं से होता था। उसके बाद निर्धारित शुल्क तय करके व्यापारी किसानों से जीरा खरीदकर उन्हें पूरे जिलेभर में बेचा करते थे। व्यापारियों की मदद से यहां से जीरा राजस्थान से बाहर भी बिकने के लिए जाता था। जीरे की खरीद-फरोख्त के लिए दूर-दूर से व्यापारी भी आते थे और आसपास में ही ठहरते भी थे। रविवार को छोड़कर दिनभर व्यापारियों का जमावड़ा लगा रहता था। अजमेर जिलेभर के लिए मशहूर इस मंडी की हालत अब जर्जर हो चुकी है। मंडी पिछले 20 सालों से बंद पड़ी है। लाखों रुपए की लागत से बनी मंडी अब वीरान पड़ी है।
वीरान पड़ा पुरानी मंडी का भवन जो खंडहर में तब्दील हो चुका है।
हरमाड़ा-तिलोनिया. हरमाड़ा गांव में दुर्दशा की शिकार हुई पुरानी मंडी।