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शिक्षा की रोशनी से वंचित बंजारा बस्ती के 125 बच्चे
श्याम मनोहर पाठक|मदनगंज-किशनगढ़
मार्बलऔद्योगिक क्षेत्र तृतीय चरण के पास बंजारा बस्ती में स्कूल नहीं है। बस्ती के सौ परिवार के 125 बच्चे केवल इसलिए स्कूल नहीं जा पाते कि बस्ती में स्कूल नहीं है। बस्ती से तीन किमी दूर स्कूल है। जिसके लिए एनएच आठ हाइवे पार कर जाना पड़ता है। परिजन मजदूरी पर चले जाते हैं और मासूमों की जान की जोखिम के चलते बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। गत सत्र में ब्रिज कोर्स शुरु कर शिक्षा विभाग ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शुरु किया परंतु अगले ही सत्र में बंद कर दिया।
स्कूल खोलने का आश्वासन जरूर मिला परंतु राजनीति के बदले हालात में स्कूल खोलना तो दूर स्कूल एकीकरण के जद में किशनगढ़ उपखंड के 47 स्कूल बंद करने की योजना पर कार्य हो रहा है। इस बस्ती के छह से चौदह वर्ष के करीब सवा सौ बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हंै। इस बस्ती से निकटतम स्कूल पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय बालिका स्कूल सांवतसर में है जो तीन किमी दूर है।
यदि इस क्षेत्र में एक प्राथमिक स्कूल बना दिया जाए तो इस बस्ती के बच्चे भी अनिवार्य शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ जाएंगे। परिजनों का कहना है कि उच्च प्राथमिक के बच्चे तो तीन किमी जा सकते है पर पांचवी कक्षा तक के छोटे बच्चे कैसे जा सकते हैं। शिक्षा विभाग स्वयं आरटीई नियम की अवहेलना कर रहा है।
पांचगरीब बस्तियों में हंै ऐसे ही हालात
राज्यसरकार द्वारा कच्ची बस्तियों में गरीब आर्थिक रूप से कमजोर, स्लम क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिक शिक्षा से जोडऩे के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। मगर सभी योजनाएं कागजों तक ही सीमित है। ब्लाक प्रारंभिक शिक्षा विभाग कार्यालय सिलोरा से मिली जानकारी के अनुसार मदनगंज किशनगढ़ क्षेत्र में ही प्राथमिक शिक्षा से लगभग तीस प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी वंचित है। इसमें बंजारा बस्ती, रेगरों की बस्ती, भीलों गाडोलिया लुहारों की बस्ती, मालियांन मोहल्ला तथा अन्य क्षेत्र में शिक्षा से अभी भी सैकड़ो विद्यार्थी वंचित है और सरकार दावे कर रही है कि योजना बनाकर इन्हें शिक्षा से जोड़ा जाएगा मगर यह दावे खोखले साबित हो रहे है। इस बार भी ड्रापआउट अनामांकित बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने को दिया गया लक्ष्य अधुरा है। शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा सें वंचित विद्यार्थियों को शिक्षा से जोडऩे के लिए