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अवैध खनन रोकने के लिए चौकी बनाई पर संसाधन नहीं

6 वर्ष पहले
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^गश्त के लिए अभी कोई साधन चौपानकी चैक पोस्ट पर नहीं है। पहले एक कैंट्रा थी लेकिन फिलहाल उसे रिपेयरिंग के लिए वर्कशॉप भेजा गया है। -प्रमोदकुमार चौधरी, रेंजर, वन विभाग किशनगढ़बास।

आए दिन होते है हादसे

वनविभागकी इस चौकी पर संसाधनों के अभाव में आए दिन हादसे हाेते रहते हैं। जिसके चलते यहां के वनरक्षक भी खौफजदा है। कुछ दिनों पहले भी वनरक्षक धारासिंह ने ड्यूटी के दौरान एक डंपर को रोका चालक तेज गति से उसकी ओर डंपर लाया। जिससे धारा सिंह के पैर में गंभीर चोट आई। वहीं, एक अन्य कैटल गार्ड राधेश्याम मीना पर भी जानलेवा हमला हुआ।

बंदूकके मुकाबले डंडा

वनविभाग की चैकपोस्ट पर लगे गार्डों के पास हथियार के नाम पर महज बांस के डंडे हैं जबकि आमतौर पर अवैध खनन के डंपर ले जाने वाले आधुनिक हथियारों से लैस रहते है। ऐसे में गश्ती दल महज खानापूर्ति ही कर पाता है।

^गश्त के लिए कोई साधन नहीं है। ऐसे में चारदीवारी में रहकर ही ड्यूटी करनी पड़ती है। सुरक्षा करना हमारा काम है। यदि गश्त के लिए कोई गाड़ी हो तो अवैध खनन के डंपरों का पीछा करने में सुविधा होगी। -बसंतकुमार डुमोलिया,फोरेस्टर वन विभाग चौपानकी।

भास्कर न्यूज | भिवाड़ी

चौपानकीथाना स्थित वन विभाग की चौकी इन दिनों संसाधनों के अभाव से जूझ रही है। अवैध खनन से संबंधित क्षेत्र होने के कारण मौजूदा चौकी बेहद संवेदनशील होने के बावजूद भी यहां सुविधाओं का अभाव है। चौपानकी थाना क्षेत्र के चूहड़पुर और आसपास के पहाड़ी इलाके में अवैध खनन रोकने के लिए वन विभाग द्वारा बनाई गई चौकी पर फोरेस्टर, वनरक्षक और कैटल गार्डों सहित दस जनों का स्टाफ कार्यरत हैं।

जबकि छह कर्मचारियों का स्टाफ रिजर्व में रखा गया है। अवैध खनन की संवेदनशीलता और क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए यह स्टाफ पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा चौकी पर किसी वाहन की भी व्यवस्था नहीं होने के कारण स्टाफ की ड्यूटी महज नाके तक ही सिमट जाती है। अवैध खनन के डंपरों को रोकने के लिए भी आधुनिक हथियारों के मुकाबले केवल एक डंडा ही उपलब्ध है।