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कृष्ण अवतार पर भक्तों ने खेली होली

5 वर्ष पहले
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कोटड़ी | मनकी निर्मलता से ही व्यक्ति धर्म से जुड़ सकेगा। शरीर को साफ तो किसी भी नदी, नाले में किया जा सकता है लेकिन क्रोध, ईष्या, छल, कपट, मान, माया, लोभ के मैल से भरे मन को साफ करने में स्वयं को ही जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए व्यक्ति को कथा, सत्संग साधु की संगत में जाना होगा। संसार में भगवान ही निर्दोष है बाकी सब दोषी होते हैं। जिसे स्वयं का ध्यान हो जाता है उसे धर्म से जुड़ कर जीवन सफल बनाने से कोई रोक नहीं सकता। यह विचार कोटड़ी के दशहरा मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को प्रेमनारायण महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रभु की वाणी का श्रवण जहां किया जाता है वहां का सारा वातावरण धर्ममय हो जाता है। वहां की जमीन भी शुद्ध हो जाती है। व्यक्ति हाथ में माला लेकर उसे घुमाता तो है लेकिन मन कहीं और विचरण करता है तो उसका माला फेरना व्यर्थ है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण के अवतार के प्रसंग पर पांडाल में मौजूद भक्त झूम उठे। भक्तों ने जयकारे लगााते हुए होली खेलकर आनंद उठाया।

कोटड़ी. दशहरा मैदान में भागवत कथा सुनने आए श्रद्धालु।

प्रेमनारायण महाराज ने कहा कि फूलों की माला पहनने वाला खुद को उच्च मानता है जबकि वह मात्र दिखावा ही होता है। माला पहनने से नहीं फेरने से ही जीवन तर सकता है। उन्होंने कहा कि मीरा ने माला फेरी तो जहर भी अमृत हो गया। बच्चा पैदा होता है तो कई पकवान से बढ़ कर मां का दूध आवश्यक होता है, जबकि व्यक्ति संसार छोड़ता है तो उसके जीवन में भगवान के नाम की फेरी माला ही साथ देती है।

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