पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • आज सूती पोशाक पहनकर जल विहार को निकलेंगे कोटड़ी श्याम

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

आज सूती पोशाक पहनकर जल विहार को निकलेंगे कोटड़ी श्याम

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जलझूलनसे पहले मंगलवार को कोटड़ी श्याम नगर भ्रमण पर निकलेंगे। रजत बेवाण में जब ठाकुरजी विराजमान होते हैं तो किसान के परिवेश में नजर आते हैं। मूंछ एक हाथ में भाला।

लाल सफेद सूती टूल (पोशाक) पहनाई जाती है। दोपहर 3 बजे पुजारी भगवान को गोद में उठाकर चांदी के बेवाण में विराजमान कराते हैं। श्रीजी का स्पर्श, दर्शन बेवाण को कंधों पर उठाने के लिए भक्तों में होड़ मच जाती है। दोपहर 3:30 बजे बेवाण को भक्त उठा लेते हैं। आगे-आगे भक्त मखमली गलीचे बिछाते हुए चलते हैं। श्रद्धालु हाथी घोड़ा पाल की, जय कन्हैया लाल की...छोगा ला छैल और बांके बिहारी लाल के जयकारे लगाते चलते हैं। रजत बेवाण की शोभायात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती है भक्तों का उत्साह चरम पर होता है।

कुछ कदम चलने के बाद अन्य मंदिरों के बेवाण भी शाही लवाजमे में शामिल होते रहते हैं। चौकी के मंदिर आते-आते 11 बेवाणों का समूह बन जाता है। सभी बेवाणों में निज मूर्ति विराजमान होती है। शाम ढलने पर कारवां सुनार घाट सरोवर की ओर बढ़ने लगता है।

तिरुपति, श्रीनाथजी का रूप भी धराते हैं पुजारी

श्रीचारभुजानाथ की प्रतिमा का शृंगार जलझूलनी एकादशी पर किसान के रूप में होता है, लेकिन वर्षभर विशेष अवसरों पर शृंगार बदलता रहता है। पुजारी शृंगार से ठाकुरजी का लाड लड़ाते हैं। कभी श्रीजी का बाल स्वरूप, श्रीनाथजी, तिरुपति बालाजी सांवरिया सेठ का रूप भी धराते हैं। सिंगोली गढ़बोर चारभुजा, द्वारकाधीश, जयपुर के गोविंद देव की छवि के दर्शनों का सौभाग्य भी यहां मिलता है।

आतिशी नजारों के बीच जल विहार करेंगे ठाकुरजी

शामढलते ही बेवाण तालाब की पाल पर पहुंच जाते हैं। बारी-बारी से भगवान को जल में झुलाया जाता है। सबके बाद ठाकुरजी को को जल विहार कराया जाता है। जब ठाकुरजी को जल में झुलाया जाता है तो वहां मौजूद भक्तों का उत्साह चरम पर होता है। चारों तरफ कोटड़ी श्याम के जयकारे लगाते भक्त नजर आते हैं। शिवालय चौक में आतिशबाजी की जाती है। आसमान में रंग-बिरंगी आतिशी नजारा करीब आधा घंटा चलता है।

घर-घरदस्तक देंगे भगवान, श्रद्धालु बिछाएंगे पलक-पावड़े

जलविहार के बाद भक्तों द्वारा आरती करने का क्रम शुरू होता है। फिर ठाकुरजी का बेवाण घर-घर दस्तक देता है। जिसके घर के बाहर भगवान पहुंचते हैं, वहां श्रीजी की आरती कर भक्त खुद को धन्य महसूस करते हैं। श्रद्धालु भी भगवान के स्वागत में पलक-पावड़े बिछा देते हैं। रातभर यह सिलसिला चलता है। अर्द्ध रात्रि बाद गणेश मंदिर चौक पर चौकी के मंदिर के ठाकुरजी बड़े चारभुजा मंदिर के ठाकुरजी बिछुड़ते है तो यह पल सबको भावविभोर कर देता है। 18 घंटे नगर भ्रमण के बाद दूसरे दिन सुबह 9 बजे पुजारी बेवाण से ठाकुरजी को गोद में उठाकर निज मंदिर में विराजमान कराते हैं।

कोटड़ी. बेवाण में विराजे कोटड़ी श्याम।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- व्यक्तिगत तथा पारिवारिक गतिविधियों में आपकी व्यस्तता बनी रहेगी। किसी प्रिय व्यक्ति की मदद से आपका कोई रुका हुआ काम भी बन सकता है। बच्चों की शिक्षा व कैरियर से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य भी संपन...

    और पढ़ें