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हिंदी भाषा अरमान है हमारी

7 वर्ष पहले
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अखिलभारतीय साहित्य परिषद की ओर से रविवार को राजकीय सरदार उच्च माध्यमिक विद्यालय में हिंदी दिवस पर काव्य गोष्ठी हुई। इसमें एक से बढ़कर एक कवियों ने कविताओं के माध्यम से हिंदी भाषा को लेकर कहा कि अभिव्यक्ति मात्र भाषा में ही अधिक प्रभावी होती है। मुख्य वक्ता डॉ. एम.पी.शर्मा ने कहा कि हृदय की कोमलता सरलता स्वयं की भाषा में ही ठीक ढंग से व्यक्त हो सकती है। कवि डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, राज केशर सिंह ने मातृ भाषा से ही संस्कार मिलने की बात कही। राष्ट्रीय मंत्री डॉ.विजय नागपाल ने ये पत्थरों का शहर, कांच है घर, कैसे हो बसर की प्रस्तुति दी। इकाई अध्यक्ष ओमप्रकाश भार्गव ने बहुत बुरा लगता है माथे से बिंदी उतारना, पर कितना सरल लगता है हिंदी की हिंदी करना की प्रस्तुति दी। कवि महेश स्वामी ने हिंदी अरमान है हमारी, हिंदी फरमान है हमारी कविता की प्रस्तुति दी। संयोजक गुरुदयाल रावत, कवि महावीर शर्मा, ओमप्रकाश सहज, उमराव गुर्जर, राजेश बैराठी, धूड़ाराम गुर्जर, महेश कौशिक, देवेन्द्र शर्मा, अजेन्द्र शेखावत ने भी कविताओं के माध्यम से हिंदी की महत्ता पर अपनी प्रस्तुति दी। मंच संचालन राजेन्द्र प्रसाद रावत ने किया। आभार महासचिव दुर्गाप्रसाद मिश्रा ने किया।

इसी प्रकार कविता एवं कवि सम्मेलन संस्था की ओर से परशुराम मंदिर में संस्था अध्यक्ष गुरुदयाल रावत की अध्यक्षता में हिंदी दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने हिंदी आज की आवश्यकता एवं उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कवि सचिन रावत, महेश स्वामी, देवेन्द्र शर्मा आदि ने कविताओं के माध्यम से है हम हिंदुस्तानी, हिंदी का संचार चाहिए कविता की प्रस्तुति दी।

कईसंस्थाओं ने मनाया हिंदी दिवस

कोटपूतली| राजकीयपानादेवी कॉलेज में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी हुई। प्राचार्य डॉ.पी.एम.शर्मा ने राष्ट्र भाषा और मातृ भाषा के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हिंदी भाषा इस देश की आत्मिक भाषा है। प्रत्येक भारतीय को हिंदी के महत्व को विश्व स्तर पर महसूस कराने के लिए आगे आना चाहिए। युवा विकास केन्द्र के प्रभारी विशंभर दयाल डॉ. कृष्णवीर सिंह ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी के हिंदी संबंधी योगदान पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं से चिंतन करने पर जोर दिया। छात्राओं ने हिंदी के विकास से संबंधित कविताओं को प्रस्तुत किया।