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पावटा मार्ग 7 साल से जर्जर, आंदोलन की चेतावनी
भास्कर न्यूज | नारेहड़ा (कोटपूतली)
पूर्णरूपसे क्षतिग्रस्त सड़क, उसमें गहरे गड्ढे, हिचकोले खाते वाहन, रोज वाहनों के टूटते पुर्जे, आए दिन लगता जाम, धूल खाने का मजबूर राहगीर, सरकार को कोसती जनता, यह दास्तान है नारेहड़ा-पावटा सड़क के बदहाल हालत की। सात साल से ऊबड़-खाबड़ हो चुकी इस सड़क के आसपास के हजारों ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शायद भाजपा का शासन आते ही इस सड़क का निर्माण होने लगेगा। उस समय ग्रामीणों में और विश्वास जग गया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। सड़क का निर्माण नहीं होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। पिछले साल 23 नवंबर को शुक्लावास बस स्टैंड पर आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर पांच रोज तक धरना दिया था।
कई वर्षों से यह सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों मे तब्दील हो चुकी है। खराब सड़क के कारण वाहन चालक भी सवारियों से मनमर्जी किराया वसूल रहे हैं। वहीं छोटे वाहन चालको का इधर से गुजरना दूभर हो चुका है। करीब तीन साल पहले भी ग्राम टसकोला में चले धरने को तत्कालीन कलक्टर ने सड़क निर्माण का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था।
नारेहड़ा से पावटा सड़क का निर्माण सबसे पहले सन् 1984 में हुआ था। इसके बाद इसके पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो जाने पर वर्ष 2008 में दुबारा से निर्माण किया गया था, लेकिन सात साल में यह सड़क पुन: क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सार्वजनिक विभाग के सहायक अभियंता धर्मसिंह यादव का कहना है कि इस सड़क निर्माण की हमारे यहां किसी तरह की कोई स्वीकृति नहीं आई है। हमने राज्य सरकार को इसके प्रस्ताव भेज रखे हैं। जैसे ही स्वीकृति आएगी काम शुरू करवा दिया जाएगा।
कोटपूतली. बदहालपावटा-नारेहड़ा मार्ग। इस सड़क पर आवाजाही जोखिम से कम नहीं है।