100 सेमी के गेहूं के पौधों की ऊंचाई 50 सेमी पर सिमटी
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी
मौसममें बदलाव का व्यापक असर रबी की फसल में देखने को मिल रहा है। बदलते मौसम के कारण फसलों की बढ़ोत्तरी थम गई। समय से पूर्व ही फसल में पकने के संकेत नजर आने लगे हैं। फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में तापमान की यह स्थिति फसलों के लिए प्रतिकूल साबित हो रही है। मौसम की सर्वाधिक मार गेहूं की फसल पर देखने को मिल रही है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल सर्दी की कमी के चलते लम्बी नहीं बढ़ पाई। ऐसे में मात्र एक-डेढ़ फीट की हाइट में पहुंचने तक ही बालियां निकल चुकी है। इनमें दाने पड़ चुके हैं। आम तौर पर गेहूं की फसल का चक्र करीब 110-135 दिन का होता है। लेकिन इस बार तापमान के चलते फसल चक्र गड़बड़ा चुका है। वर्तमान स्थिति के अनुसार तो 100 दिन से पूर्व ही फसल पकने की स्थिति में आने की संभावना जताई जा रही है। समय पूर्व फसल पकने के चलते उत्पादन खासा प्रभावित होगा। इधर, मौसम बदलाव के कारण प्याज, जीरा और सरसों की फसल पर भी रोगों का साया मंडरा रहा है। प्याज में पर्पल ब्लांच, जीरे की फसल में झुलसा(ब्लाइट) का असर होने से उत्पादन पर असर होगा।
1. गेहूं :आधी ऊंचाई से बालियों में घट रही दानों की संख्या
साधारणतौर पर 125-130 दिन में पकने वाले गेहूं के पौधे 80 से 100 सेमी की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद बालियां लगती है। इससे केवल बालियों में दानों की मात्रा ज्यादा होती है बल्कि बालियां भी भरपूर लगती है। लेकिन इस बार सर्दी कम होने से गेहूं की फसल 40 से 50 सेमी तक ही पहुंच पाई है। पौधों में बालियां भी लग चुकी हैं और उनमें दाने पड़ने लगे हैं। जानकारों के अनुसार कम ऊंचाई की बालियों में दानों की मात्रा भी आधी घट रही है।