बस स्टैंड पर लाखों खर्च, फिर भी बंद
राज्यसरकार की ओर से कस्बे में लाखों रुपए खर्च कर बस स्टैंड का निर्माण कराया गया, लेकिन स्टैण्ड परिसर की चारदीवारी कराने के कारण वर्तमान में यह दुर्दशा का शिकार हो रहा है।
पूर्व में पशुपालन विभाग की जमीन पर नया बस स्टैंड बनाया गया था। बस स्टैंड बनने के बाद वहां बसों का आवागमन भी शुरू हो गया, लेकिन पशुपालन विभाग ने बस स्टैंड की बाउंड्री करा दी। इससे बसों को आने- जाने पर परेशानी होने लगी और बसें स्टैंड पर आना बंद हो गई। रोडवेज की बसें अब भरतपुर-कुम्हेर मार्ग पर दोनों तरफ सड़क पर ही खड़ी हो जाती है। बुकिंग क्लर्क भी आसपास की दुकान पर बैठ कर ही टिकट काटते हैं। बसों के स्टैंड पर नहीं जाने से बस स्टैंड दुर्दशा का शिकार हो रहा है। बसों के सड़क पर खड़े होने से कभी-कभी वहां जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सड़क पर दोनों ओर बसें खड़ी हो जाने एवं दुकानों के आगे अतिक्रमण से मार्ग पर जाम की स्थिति बन जाती है। ट्रैक्टर, टैंपो सड़क के दोनों तरफ खड़े करने से मार्ग से बसों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
क्याकहते हैं प्रबंधक
लोहागढ़आगार प्रबंधक हरिराम मीणा का कहना है कि स्टैंड की चार दीवारी निर्माण के चलते वहां बसें खड़ी करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है तथा वहां यात्रियों की बुकिंग कम होती है। इसलिए बस स्टैंड को बंद कर दिया गया है।
कुम्हेर। रखरखाव के अभाव में रोडवेज बस स्टैंड दुर्दशा का शिकार।