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खस्ता सड़कों से रोज 20 बसों के टायर देने लगे जवाब

7 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा. खस्ताहाल सड़कों पर रोडवेज की लगभग 20 बसों के टायर रोज जवाब देने लग गए हैं, जिन्हें खोलकर देखने पर 50 प्रतिशत टायर अंदर से पूरी तरह फटे हुए मिल रहे हैं। जिले में सैकड़ों किमी सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं। ऐसे में इसका भारी खामियाजा रोडवेज को भुगतना पड़ रहा है।

स्थानीय आगार की 88 बसें दिन में करीब 33 हजार किमी का सफर तय करती हैं। इन हालात में 5 से 10 बसें बिना टायरों के खड़ी कर दी गई है। 3 गाडियां कंडम हो चुकी हैं। खराब सड़कों से और भी तकनीकी खामियां रोडवेज के गले का फांस बनी हुई है। वहीं, खराब सड़कों के कारण जहां रोडवेज बसों को नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर राहगीरों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सामान्यतया सही सड़कों पर बसें चलाने में 100 टायरों की डिमांड रहती है। जिसमें 40 टायर नए होते हैं और 60 टायर सुधरवाकर काम में लिए जाते हैं, जो आगार वर्कशॉप से ही भेजे जाते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में खराब हुई सड़कों ने यह डिमांड बढ़ाकर 150 टायरों तक पहुंचा दी है।
एक टायर की कीमत करीबन 13 से 14 हजार रुपए तक होती है। 100 टायरों की डिमांड पर यह कीमत 13 से 14 लाख तक पहुंचती है। वहीं 150 टायरों पर कीमत बढ़कर 19 लाख 50 हजार तक पहुंच जाती है।

खराब सड़कों के कारण रोडवेज कार्यशाला में पकारा पड़े टायर

बारिश के मौसम में जिले की खराब सड़कों से बसों को नुकसान हो रहा है। जिससे आगार पर अतिरिक्त भार बढ़ रहा है। ऐसे में टीम वर्क से कोशिश जारी रहती है कि यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हो। बसों के खराब होने पर तुरंत सुविधाएं दिलाना पहली प्राथमिकता रहती है। -मितत्रिवेदी, प्रबंधकसंचालन, बांसवाड़ा

एवरेज की मार झेलता आगार

जिले की खराब सड़कें रोडवेज पर अतिरिक्त भार बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। टायरों का भार बढ़ रहा है, बसों का माइलेज भी काफी कम हो गया है। जहां 6 किमी/लीटर बसों के माइलेज का एक आदर्श आंकड़ा है। सड़कों के बिगड़े हालात से यह आंकड़ा फिलहाल 3 से 4 किमी/लीटर तक पहुंच गया है। दूसरी ओर डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है।

हमारी ओर से कोशिश रहती है कि ऐसी शिकायतों पर कमी लाएं। सड़कों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। ऐसी ही सड़कें रही तो घाटे को रोका नहीं जा सकता। - राजेंद्रउपाध्याय. आगार प्रबंधक, बांसवाड़ा