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द्वापर युग का बताया चौसठ जोगणिया माताजी का मंदिर
मोहकमपुरा | बांसवाड़ाशहर से 80 किमी दूर और कुशलगढ़ से 28 किमी दूर जूनापाणी और सरोना गांव की सीमा पर स्थित श्रीचैंसठ जोगणिया माताजी का मंदिर द्वापर युग का बताया जाता है। अब इस मंदिर का वैभव लौटने लगा। यहां निसंतान और रोग से पीड़ित लोग मां के दरबार में आते हैं और जीवन की खुशियां पाते हैं। दूसरे शहरों के श्रद्धालु माताजी के दर्शन कर मुरादे पाते हैं। मंदिर का डेढ़ करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार हो रहा है। 30 मार्च 2011 की खुदाई में यहां 3 प्राचीन प्रतिमाएं मिली, जिनकी सजा-संवारकर पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर निर्माण में बांसी पहाड़पुर के पत्थरों पर माउंट आबू के शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे है। मंदिर समिति के संयोजक कुशलगढ़ के डाॅ. मधुसुदन शर्मा के अनुसार डेढ़ करोड़ की लागत से यहां हेलीपेड, अमरीकन बगीचा, धर्मशाला, सीसीटीवी कैमरे, एसटीडी बूथ, एअर कंडीशन कमरे सरीखे काम कराने प्रस्तावित हैं।
मोहकमपुरा | बांसवाड़ाशहर से 80 किमी दूर और कुशलगढ़ से 28 किमी दूर जूनापाणी और सरोना गांव की सीमा पर स्थित श्रीचैंसठ जोगणिया माताजी का मंदिर द्वापर युग का बताया जाता है। अब इस मंदिर का वैभव लौटने लगा। यहां निसंतान और रोग से पीड़ित लोग मां के दरबार में आते हैं और जीवन की खुशियां पाते हैं। दूसरे शहरों के श्रद्धालु माताजी के दर्शन कर मुरादे पाते हैं। मंदिर का डेढ़ करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार हो रहा है। 30 मार्च 2011 की खुदाई में यहां 3 प्राचीन प्रतिमाएं मिली, जिनकी सजा-संवारकर पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर निर्माण में बांसी पहाड़पुर के पत्थरों पर माउंट आबू के शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे है। मंदिर समिति के संयोजक कुशलगढ़ के डाॅ. मधुसुदन शर्मा के अनुसार डेढ़ करोड़ की लागत से यहां हेलीपेड, अमरीकन बगीचा, धर्मशाला, सीसीटीवी कैमरे, एसटीडी बूथ, एअर कंडीशन कमरे सरीखे काम कराने प्रस्तावित हैं।