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रिश्वतखोर बीडीओ सस्पेंड

6 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा। उदयपुर की जेल में बंद रिश्वतखोर गढ़ी के बीडीओ मुकेश मोड़ पटेल काे मंगलवार रात सस्पेंड कर दिया गया है। उनको निलंबित करने के आदेश पर दस्तखत बुधवार को होंगे। इसकी पुष्टि जिला परिषद के सीईओ निष्काम दिवाकर ने की।

इधर, बीडीओ मुकेश मोड़ की गिरफ्तारी के बाद से उनका लैपटॉप चर्चा में है, जिसे वे हमेशा अपने साथ रखते थे। एसीबी ने तो इसे जब्त किया है और ही इसे जांच के दायरे में लिया है। पटेल अपनी पंचायत समिति के सारे हिसाब-किताब का इस लैपटॉप में डाटा सेव रखते थे। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के बाद लैपटॉप जब्त करना था, परंतु प्रारंभिक जांच में ऐसा कोई क्लू नहीं मिलने से जब्त नहीं किया गया।

सच्चाई क्या है, यह तो अभी भी सामने नहीं आई है, परंतु पटेल के आसपास रहने वालों का कहना है कि लैपटॉप को खंगालें तो काफी कुछ जानकारी मिल सकती है। हालांकि अब विभाग क्या कार्रवाई करेगा, यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन इसमें कई अहम जानकारी मिल सकती है।

जो बीडीओ की नहीं सुनते थे, उनका तबादला

गढ़ी ब्लॉक में कुछ सचिव ऐसे थे, जो विकास अधिकारी के सिस्टम के साथ नहीं चलना चाहते थे। बीडीओ बनने के बाद जो सिस्टम तैयार किया गया था, उसमें यह ग्रामसेवक बाधा बन रहे थे। राजनीतिक हस्तक्षेप कर इनमें से 6 सचिवों का जयपुर से प्रशासनिक कारण बताकर तबादला किया गया था। एक ग्राम सेवक पदेन सचिव संगठन का ब्लॉक अध्यक्ष था। उन्हें हटाने के लिए तत्कालीन सीईओ पर दबाव डाला था।
और आखिर सीईओ से आदेश जारी करवाकर कुशलगढ़ ब्लॉक में भेजा गया था। तत्कालीन अध्यक्ष रहे ईश्वरलाल ने बताया कि मेरा स्थानांतरण जिला परिषद से हुआ था और शेष का जयपुर से हुआ था। सभी में कारण केवल प्रशासनिक कारण बताया गया।

अभी कहां है लैपटॉप

सवाल यह भी है कि जब एसीबी ने लैपटॉप जब्त नहीं किया है तो है कहां। जानकारी करने के बाद पता चला कि लैपटॉप घर पर नहीं है। कार्रवाई के बाद पटेल को एसीबी की टीम सीधे बांसवाड़ा ले आई थी। घर पर जांच के लिए एसीबी की उदयपुर टीम ने कार्रवाई की थी। लैपटॉप संभवत कार्यालय में हो सकता है। कुछ लोगों के मुताबिक इस लैपटॉप में सभी ग्राम पंचायतों से जुड़ा हुआ डाटा था।