बांसवाड़ा। मौसम में आए बदलाव के साथ गर्मी का असर बढ़ने पर एक तरफ चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू का असर कम होने को लेकर दावे किए थे, वहीं गुरुवार को महात्मा गांधी अस्पताल में एक ही दिन में एक साथ 8 स्वाइन फ्लू संदिग्ध रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें से 7 महिलाएं हैं, जिनके सैंपल ले लिए गए हैं। एक पुरुष रोगी की सामान्य चिकित्सा जांच शुक्रवार को करके उसके भी स्वाब का सैंपल लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार अस्पताल में पूर्व से 5 स्वाइन फ्लू संदिग्ध रोगी भर्ती हैं, जिनके सैंपल की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस बीच देहात से आए 8 अौर रोगियों को स्वाइन फ्लू संदिग्ध मानकर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है।
इसके साथ ही अस्पताल में अब 13 स्वाइन फ्लू संदिग्ध रोगी भर्ती हो चुके हैं। नए भर्ती हुए रोगियों में एक रोगी गढ़ी के आसन गांव का है, जिसका सैंपल लिया जाना बाकी है। इसके अलावा 7 महिला रोगियों में कुशलगढ़ के सरवण, बांसवाड़ा के निचला घंटाला की 1-1 तथा गढ़ी के आसन रोहिड़ा की 2-2 तथा एक रोगी परतापुर की है।
ये सभी गुरुवार को अस्पताल में सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित होने के कारण इलाज के लिए लाए गए थे। जांच में इनमें स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण पाने पर संदिग्ध मानकर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया।
डीएसपी के सैंपल की पुष्टि नहीं हुई
सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर पिछले दिनों स्थानीय डीएसपी विक्रमसिंह के भी स्वाब का नमूना लेकर स्वाइन फ्लू की जांच के लिए भेजा गया था। उसकी जांच रिपोर्ट गुरुवार को मिल गई, जिसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। सिंह को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया था।
किसी से हाथ नहीं मिलाएं, गले नहीं मिलें।
अपनी आंख, नाक, मुंह को हाथ लगाएं। इससे वायरस फैलते हैं।
सर्दी के मरीज साफ सुथरा रूमाल रखें और राेज बदलें।
छींकने खांसने और कहीं बाहर से आने के बाद हाथ साबुन से धोएं।
एक बार इस्तेमाल के बाद टीशू पेपर कुड़े दान में फेंक दें।
खांसी, छींक आने पर मुंह नाक को रुमाल, टीशू पेपर से ढंकें
3. कमी कहां? : स्वास्थ्य विभाग का दूसरी सरकारी एजेंसियों में सामंजस्य नहीं है। सर्वे भी मरीज मिलने के बाद उसी एरिया का कराया जा रहा है, जबकि असर पूरे जिले में माना जा सकता है। शहर में भी सर्वे के प्रति गंभीरता नहीं दिख रही।
2. किया क्या? इस साल केस मौतें बढ़ी तो सर्वे फिर शुरू, मगर अभी भी सर्वे के नाम पर मात्र कर्मचारी घरों पर जाकर औपचारिकता ही कर रहे हैं।
1. कब तक रहता है वायरस
एच1 एन 1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कोहल्स, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डवलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।
महात्मा गांधी अस्पताल में सर्दी-जुकाम-खराश सरीखी मौसमी बीमारियों से पीड़ित रोगियों की भीड़ का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। सुबह और शाम को खासी भीड़ रहने लगी है। डॉक्टर के चैंबर के अंदर से बाहर तक रोगियों की लंबी-लंबी लाइनें लग जाती है। रोगियों को जांच-इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। यही स्थिति जांचों की लेबोरेटरी में सैंपल्स देने और दवाइयां लेने के दौरान होती है, जहां भी कतार में आना पड़ता है।
दवा बेअसर
स्वाइन फ्लू का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू की रोकथाम के दावे कर रहा है, दूसरी तरफ संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टर खुद यह स्वीकारते हैं कि स्वाइन के इलाज में काम ली जा रही टेमी फ्लू दवा इस साल प्रभावी नहीं हो रही है। जीवाणुओं ने दवा के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा ली है। अब तक 74 मिली ग्राम की डोज देने के बाद भी मरीजों पर असर हो रहा था, लेकिन इस बार 150 ग्राम की मात्रा भी प्रभावी नहीं हो रही है।
अस्पताल में रोगियों की भीड़ बढ़ने के पीछे की वजह चिकित्सा विभाग का सर्वे भी है, जिसमें लोगों को छोटी-मोटी बीमारी पर भी तत्काल अस्पताल में जांच कराने की सलाह देते हुए जागरूक किया जा रहा है। स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता रखते हुए गुरुवार को आए रोगियों को संदिग्ध मानकर भर्ती किया गया है, जिनके बारे में सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई पता चल पाएगी। -नंदलालचरपोटा, कंट्रोलर, महात्मा गांधी अस्पताल
जिले में जिन जगहों से नए स्वाइन फ्लू संदिग्ध रोगी रहे हैं, उनमें से अधिकांश में पूर्व से ही सर्वे चल रहा है। जहां सर्वे नहीं हो रहा है, वहां भी शुरू करवा दिया जाएगा। -डॉ.बीपी वर्मा, सीएमएचओ।