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वाल्मीकि वार्षिक संत सम्मेलन में रामायण जैसी जीवन शैली सीखने का आह्वान किया

7 वर्ष पहले
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वाल्मीकिरामायण का अध्ययन कर ही हम मानवीय मूल्यों की स्थापना कर विश्व शांति की बुनियाद को मजबूत आधार प्रदान कर सकते हैं। यह बात वागड़ वाल्मिकी भील समाज संस्थान के अध्यक्ष गुलाब राठौड़ ने कुशलगढ़ क्षेत्र के हेजामाल बजरंगबली मन्दिर में वाल्मीकि वार्षिक संत सम्मेलन में कहीं। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण विज्ञान से परिपूर्ण है।

इसके अंदर जीवन की सार्थकता के रहस्य छिपे हुए हैं। वाल्मीकि ऋषि ने भील समाज के लिए कठोर तप कर ईश्वर से उसके उत्थान का वरदान प्राप्त किया था। आज उसी की बदौलत समाज के लोग विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर काबिज है। ऐसे में हमें वाल्मीकि रामायण से जीवनशैली सीखनी होगी। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए खातु महाराज ने कहा कि समाज को भील गुलाबजीभाई जैसे समर्पित लोग नई दिशा दे सकते हैं। मुख्य अतिथि लालू महाराज ने कहा कि आज समाज में इस तरह के आयोजनों से नई क्रांति का सूत्रपात हो रहा है। सम्मेलन में बतौर विशिष्ट अतिथि भूरा महाराज, शंकरभाई बामनिया, गौतम पटेल ने भी अपने विचार रखे। प्रारंभ में कांतिलाल गरासिया, तोलजी भाई, रमेश लबाना, अशोक कलाल, स्वसन महाराज, रामजीभाई, मोहन गरासिया, शंकर महाराज, मोतिया, मानसिंह, रमेश भगत ने अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में कई गांवों के कार्यकर्ता शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन लालूभगत पटेल लसोडिय़ा ने किया, जबकि आभार कांतिलाल परमार ने माना।

भक्तिरसमें डूबे

सम्मेलनके पश्चात रात्रि में भजन-कीर्तन के कार्यक्रम हुए। सुरेशचन्द्र गरासिया के मधुर स्वरों पर ढोलक मास्टर गौतम पटेल की थाप, मंजीरा वादक दशरथ गरासिया की लय ने धार्मिक भजनों का गायन किया। सुगनादेवी, मोहन, प्रकाश, कनु महाराज, भूरीदेवी ने भजनों की प्रस्तुति दी।

उपखंडकी कार्यकारिणी गठित

सम्मेलनके दौरान कुशलगढ़ क्षेत्र की वागड़ वाल्मिकी भील समाज संस्थान की उपखंड क्षेत्र की कार्यकारिणी घोषित की गई। जिलाध्यक्ष भीलगुलाब राठौड़ ने बताया कि संयोजक शंकरलाल बामनिया, अध्यक्ष लालूपटेल लसोडिय़ा, उपाध्यक्ष कांतिलाल हेजामाल, कोषाध्यक्ष भूरालाल, सचिव थानू महाराज, संगठन मंत्री गौतम महाराज, सदस्य के रूप में कालूभगत गरासिया, शंकर भगत मोतिया एवं नाथु पटेल, लीलादेवी बामनिया सुगनादेवी डिंडोर को शामिल किया गया है।