(शहर के डूंगरपुर लिंक रोड पर हुए गड्ढे और दाहोद रोड पर गड्ढों के कारण उड़ती धूल।)
बांसवाड़ा। शहर और जिले की सड़कों का बुरा हाल है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया है। जनजाति उपयोजना में विकास के नाम पर सिर्फ औपचारिकता हो रही है। शहर में ही कई सड़कों पर वाहन चलाते समय हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है। इसमें स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे और ग्रामीण सड़कें शामिल है। शहर में लगभग सभी सड़कों का हाल एक जैसा है। दाहोद रोड और डूंगरपुर रोड पर तो चलने में भी परेशानी है। दिनभर धूल उड़ती रहती है। यहां एक-एक फीट गहरे गड्ढे हो चुके है।
हालात ऐसे है कि यहां से गुजरने वाले हर वाहनधारी को दुर्घटना का डर बना रहता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह रवैया अपनाए हुए हैं। जबकि इन रास्तों से दिन में कई बार अधिकारी गुजरते हैं। ऐसा ही हाल लोधा ढलान से पहले आेजरिया-मकोड़िया पुल बाईपास का है। इन सड़कों के ये हालात सड़क निर्माण से संबंधित जिम्मेदार अभियंताओं द्वारा गारंटी अवधि की सड़कों का समय रहते रखरखाव नहीं करवाने के चलते हुए हैं। इधर, कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र में पुल क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं में कड़ी कार्रवाई नहीं होने से सरकारी धन का धड़ल्ले से दुरुपयोग हो रहा है।
कस्टम चौराहा से कुतुबवाड़ी सड़क पर हर पल रिस्क
कस्टमचौराहा से राजतालाब पुलिस चौकी, नवोदय विद्यालय, अंबामाता और बाबा रामदेव मंदिर से लेकर बोहरा समाज की कुतुबवाड़ी और हनुमानजी-ज्वाला मां मंदिर से आगे तक की सड़क पर से होकर गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि इस सड़क मार्ग के पुर्ननिर्माण और विस्तारीकरण के लिए 2 करोड़ 81 लाख रुपए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल में स्वीकृत कर दिए थे। ऐसा ही हाल लिंक रोड पर नवनिर्मित सड़क का है, जो कई स्थानों से धंस चुकी है।
वहीं, कॉलेज और कोको पैट्रोल पंप के बीच पाइप डालने की जगह भी धंस चुकी है, लेकिन इस पर सुधार को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर नवरात्र भी नजदीक है। केवल 11 दिन बाकी है, लेकिन अभी तक किसी भी माता के दरबार तक सड़कें ठीक नहीं की गई है। इससे भक्तों को परेशानी रहेगी।
'' भारी बारिश और भारी वाहनों के कारण सड़कें टूट रही हैं। नेशनल हाईवे पर आवागमन करने वाले भारी वाहन कम दूरी का मार्ग तय करने के लिए ग्रामीण सड़कों पर 100 से 160 टन के वाहन चलाते हैं, जिससे ये सड़कें उखड़ रही हैं। सरकार ने सड़कों के प्रस्ताव मंगवा लिए हैं, अब बारिश रुकने के बाद मरम्मत डामरीकरण का काम प्रारंभ होगा। अधिकािरयों को भी इस संबंध में शीघ्र तैयारी कर सड़कें सुधारने के लिए कहा गया है।'' मानशंकर निनामा, सांसद,बांसवाड़ा - डूंगरपुर
इधर, शहर में युवाओं ने किया कैंडल मार्च
बांसवाड़ा : नेशनल कांग्रेस ब्रिगेड जनजाति प्रकोष्ठ अध्यक्ष अतीत गरासिया के नेतृत्व में शहर की बदहाल सड़कें ठीक करवाने शनिवार शाम को कैंडल मार्च निकाला गया।
बार-बार नेशनल हाईवे, पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं से सड़क ठीक करवाने के बारे में आग्रह करने के बावजूद सड़कों की हालत में सुधार नहीं होने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में आक्रोश है। इस अवसर पर अतीत गरासिया ने कहा कि बांसवाड़ा से विभिन्न मार्गों की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे बड़े हादसे होने का अंदेशा बना हुआ है। साथ ही अंबामाता मंदिर, रामदेव मंदिर, नवाेदय स्कूल क्षेत्र में सड़क पर निरंतर पानी बहने से सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है।
इस अवसर पर गांधी मूर्ति क्षेत्र में कलीम मोहम्मद, धीरू मईड़ा, प्रकाश गाैरी हरिजन, कपिल त्रिवेदी, वीरेंद्र भोई राहुल प्रजापत, मयूर गहलोत, मुकेश रावत, पूनम बाथम आदि ने कैंडल मार्च में भाग लिया।
- करोड़ों खर्च किए, फिर भी चलने लायक भी नहीं रही सड़कें, शहर के दाहोद, डूंगरपुर और लिंक रोड बने जानलेवा।